– एमएसपी पर पूरी खरीद व समय बढ़ाने की मांग
हनुमानगढ़। टाउन धानमंडी में इस बार गेहूं की रिकॉर्ड आवक के बीच खरीद व्यवस्था को लेकर किसान और व्यापारी दोनों ही चिंतित नजर आ रहे हैं। एक ओर जहां उत्पादन में बढ़ोतरी के चलते मंडी में गेहूं की भरमार है, वहीं दूसरी ओर सीमित खरीद अवधि, कम कोटा और बारदाने की कमी जैसी समस्याओं ने हालात को और जटिल बना दिया है। हाल ही में हुई बारिश ने खुले में पड़े गेहूं को नुकसान पहुंचाया, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। ऐसे हालात में फूडग्रेन मर्चंेट्स एसोसिएशन संस्था ने सरकार से खरीद अवधि बढ़ाने और पूरी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने की मांग उठाई है। संस्था अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल ने बताया कि इस बार एफसीआई की ओर से 10 लाख बैग, तिलम संघ की ओर से 9 लाख 11 हजार बैग तथा राजस्थान फूड कॉरपोरेशन की ओर से 5 लाख 11 हजार 300 बैग गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

जबकि पिछले सीजन में टाउन धानमंडी में 28 लाख 70 हजार बैग की खरीद केवल एफसीआई की ओर से की गई थी और करीब 20 लाख बैग निजी व्यापार में बिके थे। उन्होंने बताया कि इस बार सरसों और जौ के बजाय किसानों ने अधिक क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की है, जिससे उत्पादन भी अच्छा हुआ है। ऐसे में इस बार मंडी में 50 से 55 लाख बैग गेहूं की आवक होने की संभावना है। अब तक करीब 11 लाख बैग का उठाव हो चुका है, जबकि बड़ी मात्रा में गेहूं अभी भी मंडी में पड़ा हुआ है। किरोड़ीवाल ने कहा कि बारिश के कारण खुले में पड़े गेहूं को नुकसान हुआ है और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से गेहूं खरीद की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि सभी किसानों का पूरा गेहूं एमएसपी पर खरीदा जाना चाहिए। इस संबंध में विधायक गणेश राज बंसल से भी मुलाकात की गई है, जिन्होंने खाद्य सचिव से बात कर उचित निर्णय का आश्वासन दिलाया है। संस्था के सचिव दलीप सिंह ढिल्लों ने बताया कि पहले सरकार की ओर से 30 जून तक गेहूं खरीद की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे घटाकर 30 मई कर दिया गया है।

जबकि अभी भी किसानों के पास बड़ी मात्रा में गेहूं पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि खरीद अवधि 30 जून तक बढ़ाई जाती है तो किसानों में अफरा-तफरी नहीं होगी और उपज भी सुरक्षित रहेगी। उन्होंने बताया कि इस बार निजी खरीद लगभग बंद है, जबकि पिछले साल 10 से 15 लाख बैग निजी तौर पर बिके थे। वर्तमान में मंडी में जगह की कमी हो गई है और गेहूं रखने की समस्या बढ़ गई है। हालांकि लिफ्टिंग का कार्य संतोषजनक है, लेकिन सरकारी खरीद बंद होने की अफवाह के चलते किसान जल्दबाजी में मंडी पहुंच रहे हैं।
बारदाने की कमी, आंदोलन की चेतावनी
वहीं किसान संजय पूनिया ने बताया कि वह तीन दिन पहले गेहूं लेकर मंडी आया, लेकिन अब तक उसकी फसल की खरीद नहीं हुई है। बायोमैट्रिक करवाए करीब 20 दिन हो चुके हैं। बारिश के कारण गेहूं भीग गया, जिसे सुखाने के बाद भी बारदाना नहीं मिल रहा। उन्होंने बताया कि खरीद कोटा कम होने के कारण बारदाना की कमी है और भुगतान में भी देरी हो रही है। किसान ने चेतावनी दी कि यदि रजिस्ट्रेशन के बावजूद गेहूं की खरीद नहीं की गई तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे। साथ ही उन्होंने मांग की कि टाउन धानमंडी में गेहूं खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर कम से कम 40 लाख कट्टे किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
