हनुमानगढ़। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा विश्व शांति की मंगल कामना के उद्देश्य से दिव्य ध्यान शिविर का आयोजन किया गया। इसमें संस्थान की ओर से गुरु आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी विज्ञानानन्द ने बताया कि जीवन एक यात्रा है जो कि असत्य से सत्य की, अंधकार से प्रकाश की, मृत्यु से अमृतत्व की, अज्ञानता से ज्ञान की और अग्रसर होने का शंखनाद है। परंतु विडम्बना का विषय है कि इसके विपरीत आज विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य अपनी इस यात्रा को भूल कर शांति की खोज में इधर-उधर भटक तो रहा है। परंतु शांति की प्राप्ति न कर पाने के कारण वो पहले से भी अपेक्षाकृत और अधिक धनलोलुप होता चला जा रहा है।

फलत: अशांति, अवसाद, अज्ञानता, अन्याय, अभाव, शोषण व अनैतिक मानव मूल्यों से ग्रसित मानव समाज पतन की खाई में गिरता चला जा रहा है। स्वामी ने बताया की अज्ञानता, असत्य, अन्याय मानव मन का स्वभाव है। जो को मनुष्य को अन्धकार की ओर ले जाते हैं। अंधकार के साम्राज्य में मनुष्य को कभी भी समाधान नहीं मिल सकता। कार्यक्रम में साध्वी निशा भारती व सविता भारती ने वैदिक मंत्रोच्चारण कर विश्व शांति की मंगल प्रार्थना की। साधकों ने सामूहिक साधना कर आत्मिक शांति व दिव्य अनुभूतियों को प्राप्त किया।

