हनुमानगढ़। जंक्शन स्थित धानमंडी में गेहूं के उठाव की धीमी गति के चलते किसानों और व्यापारियों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। मंडी में गेहूं से भरे थैलों के बड़े-बड़े ढेर लग गए हैं और अब नई आवक के लिए जगह भी कम पड़ने लगी है। व्यापारियों का कहना है कि समय पर उठाव नहीं होने के कारण किसानों को भुगतान में भी देरी हो रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द उठाव की गति बढ़ाई जाए, अन्यथा आंदोलन किया जाएगा। व्यापारी नेता प्यारेलाल बंसल ने आरोप लगाया कि सरकार की गेहूं खरीद को लेकर मंशा स्पष्ट नहीं है और प्रशासन केवल कागजों में दावे कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले विवादित खातों और गिरदावरी की समस्याओं को हल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक पूरी तरह समाधान नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि प्रशासन ने यह भी दावा किया था कि कई एजेंसियों के माध्यम से खरीद होने पर 24 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन वर्तमान में केवल एफसीआई की ओर से ही समय पर भुगतान किया जा रहा है, जबकि तिलम संघ सहित अन्य एजेंसियों की ओर से भुगतान 5 से 7 दिन की देरी से हो रहा है। बंसल ने यह भी बताया कि मंडी में लगातार रेल रैक लगने से काम प्रभावित हो रहा है, जिससे माल उठाव रुक जाता है और गेहूं के ढेर बढ़ते जा रहे हैं। खराब मौसम की स्थिति में इससे नुकसान का खतरा भी बना हुआ है। उन्होंने मांग की कि सीजन के दौरान 10-15 दिन तक रैक नहीं लगाए जाएं ताकि उठाव सुचारू रूप से हो सके। इसके अलावा मंडी में बारदाने की समस्या भी सामने आ रही है। व्यापारियों का आरोप है कि पुराना बारदाना दिया जा रहा है, जिसे पलटकर और मार्का लगाकर उपयोग करने को कहा जा रहा है। मजदूरों ने इस प्रक्रिया को समयसाध्य बताते हुए असमर्थता जताई है। व्यापारियों ने इन सभी समस्याओं को लेकर संबंधित अधिकारियों व जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंप दिया है और शीघ्र समाधान की मांग की है।
