हनुमानगढ़। बालश्रम एवं भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान के तहत सीडब्ल्यूसी बैंच मजिस्ट्रेट जितेन्द्र गोयल ने मंगलवार को रावतसर क्षेत्र के विभिन्न ईंट भट्ठों का दौरा कर वहां कार्यरत प्रवासी श्रमिकों के बच्चों के बीच शिक्षण सामग्री वितरित की तथा उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। इस दौरान बच्चों को कॉपी, पेन, पेंसिल, रबर, किताबें और अन्य आवश्यक अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उनमें पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करना रहा। दौरे के दौरान गोयल ने सीडब्ल्यूसी के प्रयासों से ईंट भट्ठों पर संचालित निशुल्क पाठशालाओं का निरीक्षण भी किया। उन्होंने अनौपचारिक शिक्षा केन्द्रों में अध्ययनरत बच्चों से संवाद कर उनकी शैक्षणिक प्रगति का आकलन किया तथा पाठ्यक्रम से जुड़े सवाल पूछे। बच्चों ने उत्साहपूर्वक जवाब दिए, जिस पर सही उत्तर देने वाले बच्चों को मौके पर ही पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर गोयल ने कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने का सबसे मजबूत माध्यम है और कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को भी शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज ही देश की प्रगति का आधार बनता है। उन्होंने श्रमिक अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा दिलाएं और उन्हें बालश्रम जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखें। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को अक्सर संसाधनों और जागरूकता के अभाव में शिक्षा से दूर होना पड़ता है, लेकिन प्रशासन और समाज के सामूहिक प्रयासों से उनका भविष्य संवारा जा सकता है। गोयल ने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अनुशासित जीवन अपनाने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी। इस दौरान उन्होंने ईंट भट्ठा संचालकों से भी अपील करते हुए कहा कि जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव की मंशा के अनुरूप प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सीडब्ल्यूसी और श्रम विभाग लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने संचालकों से इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। गोयल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि निरीक्षण के दौरान यदि ईंट भट्ठों पर बच्चे बालश्रम करते पाए गए तो संबंधित संचालकों के खिलाफ बाल श्रम अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शिक्षण सामग्री एवं पुरस्कार मिलने पर बच्चों के चेहरे खिल उठे, वहीं श्रमिक परिवारों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ाते हैं।
