चारणवासी। भगवान हेड की वार्ता अनुसार विभाग ने बजट में नोहर फीडर के पुनर्निर्माण के लिए बजट डिमांड की पत्रावली भेजी जा चुकी है। किसान महापंचायत में 31 मार्च तक विभाग ने डीपीआर स्वीकृत करवाने पर बड़े आंदोलन की चैतावनी किसानों द्वारा चीफ के समक्ष दी थी ऐसे में जुड़े 35 गांवों के हजारों किसानों की उम्मीदें अब पूरी तरह सरकार के बजट पर टिकी हैं। बताते चलें कि हरियाणा में बहने वाली 226 क्यूसेक क्षमता वाली नोहर फीडर पूर्ण रूप से डैमेज हो चुकी है सन् 2022 में जल शक्ति आयोग द्वारा एक टीम का गठन कर जांच करवाई जिसमें टीम ने स्पष्ट उल्लेख किया कि हरियाणा क्षेत्र में नोहर फीडर का पुननिर्माण होने पर ही पूरा पानी मिलेगा यही अंतिम विकल्प है उसके बाद इंजीनियरों ने नोहर फीडर की रि-लाइनिंग का 45 करोड़ रुपए का प्रपोजल बनाया था जिसमें केंद्र का 60 %और राज्य की 40% बजट की हिस्सेदारी तय की,2023 के बजट में गहलोत सरकार ने राज्य के हिस्से के 20 करोड़ की घोषणा की। अब किसानों की उम्मीदें आने वाले बजट पर इसलिए टिकी हैं क्योंकि जल शक्ति आयोग के हस्तक्षेप के बाद 139.51 करोड़ की पीएफआर सबमिट हुई है।
राजस्थान सरकार को बरवाली नहर की रि-लाइनिंग का बोझ उठना पड़ सकता हैं –
वर्तमान में बरवाली नहर 226 क्यूसेक की क्षमता पर चल रही है, जिसमें 106 क्यूसेक राजस्थान का पानी है। हरियाणा का तर्क यह है कि यदि राजस्थान बरवाली नहर में से हिस्सेदारी हटाकर अपनी अलग 332 क्यूसेक की नोहर फीडर बना लेता है, तो बरवाली नहर में पानी घटकर मात्र 112 क्यूसेक रह जाएगा। हरियाणा के सिंचाई विभाग का कहना है कि इतने कम पानी में मौजूदा बड़े मोघे तकनीकी रूप से काम नहीं कर पाएंगे,इसलिए हरियाणा की जिद है कि राजस्थान न केवल अपनी नोहर फीडर बनाए, बल्कि हरियाणा की बरवाली नहर को भी कम क्षमता (112 क्यूसेक) के हिसाब से नए सिरे से डिजाइन और पुनर्निर्मित करके दे।
सरकार एकमुश्त बड़े बजट का प्रावधान करें –
शुरुआत में जिस काम की लागत 45 करोड़ आंकी गई थी, वह अब देरी और नई मांगों के कारण 139.51 करोड़ (PFR के अनुसार) तक पहुंच चुकी है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार इस बार हरियाणा के साथ विवाद को सुलझाते हुए एकमुश्त बड़े बजट का प्रावधान करेगी। यदि इस बजट में हरियाणा की बरवाली नहर के पुनर्निर्माण की शर्त को स्वीकार करते हुए अतिरिक्त फंड जारी होता है, तभी इस योजना की फाइल आगे बढ़ेगी। वरना, यह मामला एक बार फिर अंतर्राज्यीय बैठकों और फाइलों के फेर में फंसकर रह जाएगा ।
