हनुमानगढ़। राजस्थानी गांव बहलोलनगर में गुरुवार को भारतीय जीवन बीमा निगम के तत्वावधान में गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें बचत व जीवन बीमा से जुड़ी पॉलिसी के बारे में जानकारी दी गई। इससे पहले बलवंत राजपुरोहित, कवि हरीश हैरी, नवयुवक संस्था अध्यक्ष पालाराम इंदलिया, विनोद शर्मा ने राजस्थानी भाषा में छपे बैनर का लोकार्पण किया। आपणो राजस्थान आपणी राजस्थानी के संस्थापक हरीश हैरी ने बताया कि गांव में बैनर, पोस्टर राजस्थानी भाषा में छपवाने का प्रचलन है। बहलोलनगर राजस्थानी भाषा को व्यवहार की भाषा बनाकर मान्यता देने वाला पहला मॉडल गांव है। इसी तर्ज पर पूरे राजस्थान में राजस्थानी को व्यवहार और व्यापार की भाषा बनाकर हमें पहले खुद मान्यता देनी होगी। अभिकर्ता प्रहलादराय सैन ने बताया कि नागरिकों को भविष्य की बचत और सुरक्षा के लिए बीमा जरूर करवाना चाहिए। राजस्थानी में पोस्टर छपवाने से आम आदमी जुड़ाव महसूस करता है तथा आम आदमी राजस्थानी भाषा में बताई गई जानकारी को जल्दी और अच्छी तरह से समझ लेता है। उन्होंने बताया कि पिछले 7 वर्षांे से राजस्थानी भाषा में ही बैनर, पोस्टर तैयार करवा रहे हैं। इससे व्यापार में लाभ के साथ राजस्थानी भाषा की जागरूकता को भी बल मिला है। राजस्थानी में पोस्टर छपवाने के कारण अलग तरह की पहचान मिली है। बीमा की पॉलिसी भी ज्यादा मिली जिससे व्यापार में फायदा मिला है। राजस्थानी प्रेम, पैसा और पहचान दिलवानी वाली भाषा है। पालाराम इंदलिया ने कहा कि भारत के सबसे बड़े प्रदेश राजस्थान की राजभाषा राजस्थानी होनी चाहिए। भाषा मान्यता की मुहिम में युवाओं की अहम भूमिका सिद्ध होगी क्योंकि राजस्थानी को मान्यता मिलने से युवाओं को नौकरियों में बहुत बड़ा फायदा मिलेगा।
