मथुरा। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का गुरुवार को मथुरा आगमन पर भव्य स्वागत किया गया। वे 81 दिवसीय गौप्रतिष्ठा (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा के 40वें दिन हाथरस जनपद से बलदेव क्षेत्र होते हुए मथुरा पहुंचे। खंडेलवाल सेवा सदन में श्रद्धालुओं, गौभक्तों और अनुयायियों ने फूलों की वर्षा कर उनका अभिनंदन किया। सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार हैं। उन्होंने बताया कि 3 मई को गोरखपुर से शुरू हुई यह गौप्रतिष्ठा यात्रा उत्तर प्रदेश के लगभग 200 विधानसभा क्षेत्रों से होकर मथुरा पहुंची है। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि गौरक्षा के लिए जनजागरण का व्यापक अभियान है। शंकराचार्य ने कहा कि देश को स्वतंत्र हुए 78 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन गौमाता को अभी तक अपेक्षित संरक्षण और सम्मान नहीं मिल पाया है। उन्होंने समाज और मतदाताओं से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले समय में गौ संरक्षण को प्रमुख जनमुद्दा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सभी भक्तों और गौभक्तों से गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के लिए एकजुट होकर जनजागरण अभियान चलाने की अपील की। उनका कहना था कि गौरक्षा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और राष्ट्र की पहचान से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से गौसेवा और गौसंवर्धन के लिए संगठित प्रयास करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने गौरक्षा का संकल्प लिया। साक्षात्कार के दौरान अन्य समसामयिक विषयों पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में शंकराचार्य ने कहा कि कानून और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे देश के सामने हैं, जिन पर वह उचित समय आने पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प और गौरक्षा के संदेश के साथ हुआ।
