ऐलनाबाद। दंपत्तियों के प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए पुरुषों की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। प्रजनन स्वास्थ्य की दृष्टि से पुरुष नसबंदी एक महत्वपूर्ण और प्रभावी विकल्प है, जो महिला नसबंदी की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जाती है। पुरुष नसबंदी एक साधारण शल्य प्रक्रिया है, जिसमें न्यूनतम संसाधनों और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। सिविल सर्जन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 10 फरवरी तक विशेष पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत पुरुष नसबंदी से संबंधित विभिन्न जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
इस प्रकार की जाती है पुरुष नसबंदी
उप-सिविल सर्जन डॉ. भारत भूषण मित्तल ने बताया कि इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ एवं खुशहाल परिवार, पुरुष सहभागिता से ही होगा यह सपना साकार’ रखी गई है। एनएसवी (नो-स्कैल्पल वैसक्टॉमी) विधि से की जाने वाली पुरुष नसबंदी में न तो चीरा लगाया जाता है और न ही टांके लगते हैं। इससे पुरुष की पौरुष क्षमता पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। यह एक सरल प्रक्रिया है, जिसे प्रशिक्षित सर्जन द्वारा मात्र 10 से 20 मिनट में पूरा कर लिया जाता है। ऑपरेशन के दो दिन बाद लाभार्थी सामान्य कार्य तथा सात दिनों के बाद भारी कार्य भी कर सकता है।
पुरुष नसबंदी पर अधिक प्रोत्साहन राशि
जिला काउंसलर कमल कक्कड़ ने बताया कि महिला नसबंदी की तुलना में पुरुष नसबंदी कराने पर अधिक प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। पुरुष लाभार्थी को नसबंदी कराने पर 2000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। प्रजनन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पुरुष नसबंदी से संबंधित विस्तृत जानकारी दी.
