– हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. सुरेश बाजिया की सलाह-धूम्रपान से बनाएं दूरी, रोजाना 40 मिनट करें व्यायाम और तनाव से बचें, हार्ट अटैक के लक्षण दिखने पर समय गंवाए बिना लें आपातकालीन चिकित्सा सहायता
हनुमानगढ़। मौसम में बदलाव के साथ सर्दी का सीजन शुरू होने लगा है। वहीं, त्योहारों के दौरान खानपान और दिनचर्या में बदलाव के बीच स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की जरूरत भी बढ़ गई है। बदलते मौसम में सांस संबंधी बीमारियों, विशेषकर अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। इसके साथ ही हृदय रोगों को लेकर भी सावधानी बरतना जरूरी है। चिकित्सकों के अनुसार, अनियमित दिनचर्या, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनाव जैसे कारक हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। शहर के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. सुरेश बाजिया ने बताया कि आज के समय में कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले चिंता का विषय हैं। पहले हृदयाघात को अधिक उम्र के लोगों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने युवाओं को अपनी सेहत के प्रति गंभीर होने और समय रहते जीवनशैली में सुधार करने की सलाह दी।
40 साल से कम उम्र के युवाओं में भी हार्ट अटैक चिंता का विषय
डॉ. बाजिया ने बताया कि हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में धूम्रपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनाव शामिल हैं। आजकल युवा अपने कामकाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि नियमित व्यायाम के लिए भी समय नहीं निकाल पाते। लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक सक्रियता से दूरी और तनावपूर्ण जीवनशैली स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। नियमित रूप से व्यायाम करना, संतुलित दिनचर्या अपनाना और तनाव को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। प्रतिदिन 30 से 40 मिनट शारीरिक गतिविधि के लिए निकालने से स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, व्यायाम की तीव्रता अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही रखनी चाहिए।
ठंड में सावधानी बरतें, अचानक न करें हार्ड एक्सरसाइज
मौसम में बदलाव के दौरान शरीर को ठंड से बचाने और दिनचर्या में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। डॉ. बाजिया ने सलाह दी कि ठंड के दिनों में सुबह बहुत जल्दी अत्यधिक मेहनत वाला व्यायाम करने से बचें। बिना तैयारी के अचानक कठिन एक्सरसाइज करना या जिम में अपनी क्षमता से अधिक जोर लगाना उचित नहीं है। व्यायाम से पहले शरीर को तैयार करें और जरूरत के अनुसार उसकी तीव्रता बढ़ाएं। उन्होंने गुनगुने पानी का इस्तेमाल करने, ठंड से बचाव करने और खुशमिजाज रहने की सलाह भी दी। जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी, उच्च रक्तचाप या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें व्यायाम शुरू करने अथवा उसकी तीव्रता बढ़ाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
छाती में दर्द हो तो न करें लापरवाही
डॉ. बाजिया के अनुसार, छाती में दर्द या दबाव महसूस होना हार्ट अटैक का प्रमुख चेतावनी संकेत हो सकता है। इसके अलावा सांस फूलना, ठंडा पसीना आना, मतली, चक्कर आना अथवा दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना भी गंभीर लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक की स्थिति में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। जितनी जल्दी मरीज को उचित चिकित्सा सुविधा मिलती है, हृदय की मांसपेशियों को होने वाले स्थायी नुकसान को उतना ही कम करने की संभावना रहती है। इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल एम्बुलेंस सेवा की मदद लें और मरीज को ऐसे अस्पताल पहुंचाएं जहां हृदय संबंधी आपातकालीन उपचार उपलब्ध हो। हार्ट अटैक के संदेह में डिस्प्रिन या एस्पिरिन अपने स्तर पर देने के बजाय आपातकालीन चिकित्सा सेवा के निर्देशों का पालन करें। कुछ मरीजों में यह दवा नुकसान पहुंचा सकती है। छाती में दर्द होने पर इंतजार न करें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
प्रदूषण से सांस के मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी
डॉ. बाजिया ने बताया कि वातावरण में प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा और अन्य सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे मरीजों को प्रदूषण वाले वातावरण में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए तथा चिकित्सक की ओर से निर्धारित दवाओं का नियमित इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश में मधुमेह के मामले बढ़ना चिंता का विषय है। शारीरिक गतिविधियों में कमी, असंतुलित जीवनशैली और खानपान से जुड़ी आदतें इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। बच्चे भी आउटडोर खेलों से दूर होते जा रहे हैं, जबकि युवा कामकाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपनी सेहत को पर्याप्त समय नहीं दे पाते।
सेहत के लिए रोजाना निकालें समय
डॉ. बाजिया ने लोगों से अपील की कि वे अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी और तनाव प्रबंधन को जीवन का हिस्सा बनाएं। बदलते मौसम में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और किसी भी गंभीर लक्षण के दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सहायता लें। जागरूकता और समय पर उपचार से हृदय तथा सांस संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
