हनुमानगढ़। जिले में कृषि भूमि नामांतरण को लेकर विवाद सामने आया है। शुक्रवार को काशीराम पुत्र गंगाराम कुम्हार निवासी रामसरा नारायण की ओर से राजस्व मंडल, अजमेर को भेजे गए शिकायत पत्र में सहायक कलक्टर एवं उपखंड अधिकारी और तहसीलदार (राजस्व) पर मिलीभगत कर अवैध तरीके से आदेश पारित करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार चक 22 एचएमएच, पटवार हरपत फतेहगढ़ स्थित खाता संख्या 55/48 की करीब 3.148 हेक्टेयर कृषि भूमि को लेकर गोविंद बनाम गिरदावरी देवी पत्नी काशीराम एवं अजय कुमार आदि बनाम गिरदावरी देवी प्रकरण विचाराधीन थे। इस दौरान प्रार्थीया गिरदावरी देवी की ओर से सिविल न्यायालय में संबंधित बैयनामों को कूटरचित बताते हुए वाद भी दायर किया गया था, जो अभी लंबित है। इसके बावजूद आरोप है कि सहायक कलक्टर ने सिविल वाद लंबित होने और राजस्व बोर्ड में रिवीजन पेश होने के बावजूद धारा 212 राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के तहत सुनवाई जारी रखते हुए गिरदावरी देवी की आपत्तियों और प्रस्तुत साक्ष्यों को नजरअंदाज कर आदेश पारित कर दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उक्त आदेश गोविंद व सुरेन्द्र कुमार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पारित किया गया। आगे आरोप है कि तहसीलदार ने सहायक कलक्टर के आदेश की आड़ में बैंक को तीन दिन में ऋण राशि जमा कराने का निर्देश देते हुए तथाकथित तुगलकी फरमान जारी किया। इसके आधार पर बैंक प्रबंधन ने बिना प्रार्थीया गिरदावरी देवी को सूचना दिए तीसरे पक्ष से ऋण राशि जमा करवा ली और अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसके बाद जल्दबाजी में कृषि भूमि का नामांतरण भी कर दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने संबंधित बैयनामों को फर्जी और बिना प्रतिफल का बताते हुए दस्तावेज, न्यायिक दृष्टांत और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए, लेकिन अधिकारियों ने उनकी सुनवाई नहीं की। यहां तक कि एक पक्ष के खिलाफ पूर्व में दर्ज मामलों और चेक अनादरण संबंधी दस्तावेजों को भी नजरअंदाज किया गया। काशीराम ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, उनकी राजस्व शक्तियां वापस लेने तथा फौजदारी अभियोजन चलाने की मांग की है। उधर, इस मामले में तहसीलदार (राजस्व) ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उपखंड अधिकारी न्यायालय में दर्ज प्रकरण में अप्रार्थी के विरुद्ध निर्णय पारित किया गया था, जिसमें तहसीलदार को नामांतरण संबंधी निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे। तहसीलदार के अनुसार, उक्त आदेश के अनुपालन में बैंक की अनापत्ति, उपलब्ध साक्ष्यों और नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करते हुए ही नामांतरण का निर्णय पारित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष को इस निर्णय पर आपत्ति है तो वह सक्षम न्यायालय में अपील कर सकता है।
