– स्वाभिमान बचाओ आंदोलन के तहत मंत्रालयिक कर्मचारियों ने सौंपा ज्ञापन
हनुमानगढ़। पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन, राजस्थान की जिला शाखा ने पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत मंत्रालयिक कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सोमवार को राज्य सरकार के नाम उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए आर-पार के आंदोलन की चेतावनी दी है। 25 मई से चल रहे स्वाभिमान बचाओ आंदोलन की कड़ी में सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पंचायती राज विभाग पिछले दो वर्षांे से मंत्रालयिक संवर्ग के लगभग 16 हजार कर्मचारियों की मांगों पर विचार नहीं कर रहा है। संगठन का कहना है कि कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 की जांच का हवाला देकर कर्मचारियों की मौलिक एवं सेवा संबंधी मांगों को लंबित रखा गया है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि जांच प्रक्रियाओं के नाम पर कर्मचारियों के हितों की अनदेखी बंद कर लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लिया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 7 जुलाई को जयपुर में जल महल तक पदयात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद प्रेस वार्ता कर संगठन कथित अनियमितताओं और मंत्रालयिक कर्मचारियों के हितों को प्रभावित करने से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करेगा। साथ ही प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर सामूहिक जल समाधि आंदोलन की भी चेतावनी दी गई है। ज्ञापन के जरिए ग्राम पंचायतों में कार्यरत कनिष्ठ एवं वरिष्ठ सहायकों का ग्राम विकास अधिकारियों के समान अधिकारों सहित जॉब चार्ट जारी करने, पंचायत लेखों में मेकर-चेकर-अप्रूवर प्रणाली लागू करने, उत्तराखंड मॉडल की तर्ज पर व्यवस्थाएं लागू करने, मंत्रालयिक संवर्ग का कैडर पुनर्गठन करने तथा पदोन्नति के अवसर बढ़ाने की मांग की गई है। इसके अलावा कर्मचारियों के अंतरजिला स्थानांतरण, न्यायालय के आदेशानुसार नोशनल लाभ, कनिष्ठ सहायकों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित करने, ग्रेड पे 3600 लागू करने, हार्ड ड्यूटी भत्ता एवं अतिरिक्त प्रभार भत्ता स्वीकृत करने तथा ग्रामीण विकास राज्य सेवा में 50 प्रतिशत पद पदोन्नति के लिए आरक्षित करने जैसी मांगें भी ज्ञापन में शामिल हैं। मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ जिलाध्यक्ष इन्द्रजीत शर्मा ने बताया कि स्वाभिमान बचाओ आंदोलन की कड़ी में 10 जून को राज्यभर में एकसाथ संपूर्ण आधे दिन के लिए कार्य बहिष्कार रखते हुए पेन डाउन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं। यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। इस मौके पर जगपाल मान, घनश्याम कड़वासरा, राजेश गोदारा, बादल सिंह, रोबिन सिंह, जीतराम, बलदेव सिंह, ममता, वीरपाल, आशा, भूपेन्द्र सिंह, परविंद्र, निर्भय मौजूद रहे।
