– जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के शैक्षणिक भ्रमण में समझी नि:शुल्क कानूनी सहायता की प्रक्रिया
हनुमानगढ़। टाउन स्थित नेहरू मेमोरियल विधि महाविद्यालय के प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं स्थाई लोक अदालत का शैक्षणिक भ्रमण कर नि:शुल्क विधिक सहायता की प्रक्रिया और न्यायिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को नि:शुल्क कानूनी सहायता के प्रावधानों, आमजन को न्याय सुलभ करवाने और स्थाई लोक अदालत की भूमिका के बारे में बताया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सीताराम ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने विद्यार्थियों को ‘नि:शुल्क विधिक सहायताÓ, ‘न्याय सबके द्वारÓ और ‘न्याय पाना मेरा अधिकारÓ जैसे अभियानों की जानकारी देते हुए बताया कि संविधान के अनुच्छेद 39-क में समान न्याय और नि:शुल्क विधिक सहायता का प्रावधान किया गया है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के माध्यम से इस व्यवस्था को लागू किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पहुंचने पर प्राधिकरण सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश गजेन्द्र तेनगुरिया ने विद्यार्थियों को नि:शुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया और प्राधिकरण की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि न्यायालयों में लंबी और खर्चीली प्रक्रिया के मुकाबले विधिक सेवा प्राधिकरण जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे आमजन को न्याय प्राप्त करने में मदद मिलती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्थाई लोक अदालत अध्यक्ष पवन शर्मा ने स्थाई लोक अदालत की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि यहां लोक उपयोगी सेवाओं से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाती है। इस व्यवस्था में नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने के साथ कागजी कार्यवाही को न्यूनतम रखने का प्रयास किया जाता है, जिससे आमजन को राहत मिल सके। महाविद्यालय के विधिक सेवा क्लिनिक प्रभारी एवं सहायक आचार्य डॉ. बृजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय में संचालित नि:शुल्क विधिक सहायता एवं सलाह सेवा के बारे में बताया। विद्यार्थियों ने नि:शुल्क विधिक सहायता से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका न्यायिक अधिकारियों ने उत्तर देकर उनकी विधिक जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस मौके पर महाविद्यालय के वरिष्ठ सह-आचार्य डॉ. केबी ओझा, सहायक आचार्य क्रांति गिला, अन्य शैक्षणिक स्टाफ एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
