– चिकित्सकीय लापरवाही बताकर निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग, डॉक्टर बोले-वृषण नहीं, केवल मवाद निकाली थी
हनुमानगढ़। डबलीराठान निवासी एक व्यक्ति का वृषणकोष उसकी सहमति के बिना निकालने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को उसके परिजनों ने भारत की जनवादी नौजवान सभा के बैनर तले टाउन स्थित एसएलजी हॉस्पिटल के बाहर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। डीवाईएफआई नेता शेरसिंह शाक्य ने बताया कि डबलीबास मौलवी के वार्ड नंबर 10 निवासी नीटू सिंह पुत्र महेन्द्र सिंह के बाएं वृषणकोष में दर्द होने पर उसने पहले स्थानीय चिकित्सक को दिखाया। जांच के बाद उसे विशेषज्ञ चिकित्सक के पास जाने की सलाह दी गई। इसके बाद 18 मार्च को वह एसएलजी हॉस्पिटल में यूरोलॉजिस्ट डॉ. जितेन्द्र अग्रवाल के पास पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक ने वृषणकोष में संक्रमण और मवाद होने की बात कहकर भर्ती किया तथा मवाद निकालने की बात कही, लेकिन बाद में बिना सहमति के उसका एक वृषणकोष निकाल दिया।

परिजनों का कहना है कि बाद में जब मरीज ने जिला अस्पताल में जांच करवाई तो वहां अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में एक वृषण नहीं होने की जानकारी मिली। इसे चिकित्सकीय लापरवाही बताते हुए उन्होंने दोषी चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा विशेषज्ञ समिति से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। वहीं, एसएलजी हॉस्पिटल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. जितेन्द्र अग्रवाल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज जब उनके पास आया था, तब उसके वृषणकोष में गंभीर संक्रमण और मवाद से संबंधित समस्या थी। मरीज और उसके परिजनों को पहले ही समझा दिया गया था कि आवश्यकता पड़ने पर मवाद के साथ वृषण भी निकालना पड़ सकता है। हालांकि मरीज की कम उम्र को देखते हुए केवल संक्रमित मवाद निकाली गई और वृषण को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया। डॉ. अग्रवाल के अनुसार मरीज को नियमित रूप से ड्रेसिंग और उपचार के लिए अस्पताल आने की सलाह दी गई थी, लेकिन वह केवल एक बार ही फॉलोअप के लिए आया। करीब दो माह बाद दोबारा आने पर संक्रमण बढ़ चुका था और फाइब्रोसिस की स्थिति बन गई थी। उस समय भी मरीज को वृषण निकालने की आवश्यकता पड़ने की संभावना से अवगत कराया गया था, लेकिन इसके बाद वह उपचार के लिए वापस नहीं आया।
