हनुमानगढ़। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की ओर से गुरुवार को शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर उपखण्ड कार्यालय समक्ष उपखंड स्तरीय विरोध प्रदर्शन किया गया। संगठन के पदाधिकारियों और शिक्षकों ने उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग करते हुए सरकार पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया गया। संगठन के खण्ड अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने कहा कि प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर संवाद और वार्ता की गई, लेकिन दो वर्षांे से अधिक समय बीतने के बावजूद शिक्षकों के ज्वलंत मुद्दों का समाधान नहीं हो सका। इससे प्रदेश के लाखों शिक्षकों में आक्रोश और निराशा व्याप्त है। शिक्षण व्यवस्था तथा शिक्षकों से जुड़े न्यायोचित एवं विधिसम्मत मामलों में समयबद्ध कार्रवाई नहीं होने से शिक्षक वर्ग उद्वेलित है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो शिक्षक आंदोलन को और तेज करेंगे। ज्ञापन में शिक्षकों की विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया गया। इनमें ग्रीष्मावकाश सहित सभी अवकाश यथावत रखने और शिविरा कैलेंडर में संशोधन करने, तृतीय वेतन श्रृंखला सहित सभी संवर्गांे के स्थानांतरण करने, लंबित पदोन्नतियां जारी करने तथा क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति देने की मांग शामिल है। इसके अलावा शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यांे से मुक्त करने, आरजीएचएस योजना को सुचारू रखने, वेतन विसंगतियां दूर करने, संविदा शिक्षकों को नियमित करने तथा 2005 और 2008 के शिक्षकों को टेट परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त रखने की मांग भी ज्ञापन में उठाई गई। महासंघ ने शारीरिक शिक्षकों के स्थायीकरण, मिड डे मील मेन्यू में सुधार तथा कुक कम हेल्परों का मानदेय बढ़ाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाना आवश्यक है, ताकि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
