– हनुमानगढ़ जिला इकाई ने केरल सरकार की कार्रवाई को बताया अनुचित-शिक्षक की अकादमिक स्वतंत्रता, निष्पक्ष जांच और सम्मानपूर्वक सेवा बहाली की उठाई मांग
हनुमानगढ़। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की हनुमानगढ़ जिला इकाई ने केरल के कासरगोड जिले के कुंबला उप-जिले में आयोजित विद्यालयी सामाजिक विज्ञान ‘फ्रीडम क्विज’ में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछे जाने के मामले में प्रश्न निर्माण से जुड़े शिक्षक श्री गुरु प्रसाद के निलंबन का विरोध किया है। महासंघ के जिला अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने केरल के राज्यपाल को पत्र भेजकर शिक्षक का निलंबन तत्काल वापस लेने तथा उन्हें सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल करने की मांग की है। पत्र जिला कलेक्टर हनुमानगढ़ के माध्यम से भेजा गया है। महासंघ ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रबोध, राष्ट्रीय चरित्र, सांस्कृतिक आत्मगौरव और कर्तव्यबोध के निर्माण का महत्वपूर्ण साधन है। संगठन के अनुसार, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और घटनाओं का तथ्याधारित एवं समग्र अध्ययन विद्यार्थियों को कराया जाना शिक्षा का दायित्व है।
‘सावरकर पर प्रश्न पूछना अपराध या अनुशासनहीनता नहीं’
पत्र में महासंघ ने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व रहे हैं। उनके क्रांतिकारी जीवन, ब्रिटिश शासन द्वारा दिए गए दंड तथा अंडमान की सेलुलर जेल में उनके कारावास का अध्ययन इतिहास का हिस्सा है। संगठन का कहना है कि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व के विचारों से सहमति अथवा असहमति अलग विषय है, लेकिन उस व्यक्तित्व से संबंधित प्रश्न पूछना न तो अपराध है और न ही अनुशासनहीनता। महासंघ ने कहा कि यदि प्रश्न में कोई तथ्यात्मक या भाषाई त्रुटि थी तो उसे संशोधित किया जा सकता था। जांच पूरी होने से पहले शिक्षक के विरुद्ध निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई को संगठन ने अनुचित और अनुपातहीन बताया है।
प्रश्नावली की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग
महासंघ ने पत्र में यह भी कहा कि यदि प्रश्नावली संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के अनुमोदन के बाद विभिन्न विद्यालयों में प्रसारित हुई थी, तो केवल प्रश्न तैयार करने वाले शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। प्रश्न तैयार करने, उसके स्रोत, जांच और अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया का निष्पक्ष परीक्षण किया जाना चाहिए। संगठन ने कहा कि किसी तथ्यात्मक त्रुटि की स्थिति में संबंधित शिक्षक एवं अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेकर आवश्यक सुधार किया जा सकता था।महासंघ के अनुसार, जांच पूरी होने से पहले निलंबन जैसी कार्रवाई से शिक्षक समुदाय में भय और आत्म-सेंसरशिप का वातावरण पैदा हो सकता है। संगठन ने शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक दबाव और वैचारिक प्रभाव से मुक्त रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘विद्यार्थियों को प्रश्न और तर्क करने के लिए सक्षम बनाना शिक्षक का दायित्व’
पत्र में कहा गया कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल या विचारधारा की संपत्ति नहीं है। गांधी, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सरदार पटेल, लोकमान्य तिलक, श्री अरविंद, सावरकर सहित अनेक ज्ञात-अज्ञात राष्ट्रभक्तों के त्याग और बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन की राष्ट्रीय गाथा बनी है। विद्यार्थियों को स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न धाराओं और प्रमुख व्यक्तित्वों का तथ्य एवं प्रमाण आधारित अध्ययन कराया जाना चाहिए। महासंघ ने कहा कि शिक्षक का दायित्व विद्यार्थियों को किसी विशेष विचारधारा की ओर ले जाना नहीं, बल्कि उन्हें प्रश्न करने, तर्क करने, प्रमाणों की जांच करने तथा विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने में सक्षम बनाना है। संगठन ने कहा कि निर्भीक नागरिकों के निर्माण के लिए निर्भीक शिक्षक आवश्यक हैं।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील
महासंघ की हनुमानगढ़ जिला इकाई ने राज्यपाल से पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर केरल सरकार से शिक्षक श्री गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल वापस लेने और उन्हें सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। साथ ही संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पूर्वाग्रह-मुक्त जांच कराने तथा शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। यह पत्र अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान की हनुमानगढ़ जिला इकाई के जिला अध्यक्ष मनमोहन शर्मा की ओर से भेजा गया है। पत्र में संगठन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष रमेशचंद्र पुष्करणा, प्रदेश संगठन मंत्री उमराव लाल वर्मा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा, जिला अध्यक्ष मनमोहन शर्मा तथा जिला मंत्री सुल्तान सिंह मेहरड़ा के नाम एवं संपर्क विवरण भी अंकित हैं।
