-दुर्लभ योगों में होगी मां भगवती की आराधना, देवी मंदिरों में आठ दिन चलेंगे विशेष अनुष्ठान
हनुमानगढ़। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की गुप्त नवरात्रि इस वर्ष 15 जुलाई से शुरू होगी और 22 जुलाई को भड़ली नवमी के साथ इसका समापन होगा। पंचांगीय गणना के अनुसार इस बार 17 जुलाई को चतुर्थी तिथि का क्षय होने से तृतीया और चतुर्थी तिथि की पूजा एवं अनुष्ठान एक ही दिन संपन्न होंगे। पंडित ने बताया कि इस बार गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ मातंग योग, हर्षण योग, गजकेसरी योग, बुधादित्य योग, पुष्य नक्षत्र तथा कर्क राशि में स्थित चंद्रमा जैसे दुर्लभ और शुभ संयोगों में हो रहा है। देवी मंदिरों और शक्तिपीठों में आठ दिनों तक विशेष गुप्त अनुष्ठान, दुर्गा सप्तशती पाठ और महाआरती का आयोजन किया जाएगा। गुप्त नवरात्रि में बाहरी आडंबर का स्थान नहीं होता। मौन, अनुशासन, नियम, संयम और गोपनीयता के साथ मां भगवती की साधना का विधान माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान साधकों और तांत्रिक उपासकों द्वारा मां दुर्गा के दस दिव्य स्वरूपों और दस महाविद्याओं की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि इनकी साधना से मानसिक कष्ट, शत्रु बाधा और तंत्र बाधाओं से मुक्ति के साथ आध्यात्मिक उन्नति और संकल्प सिद्धि प्राप्त होती है। साधकों को ऊर्जा और सकारात्मकता का अनुभव होता है।
महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां काली की साधना से कालसर्प दोष, मांगलिक दोष और मृत्यु भय से मुक्ति, मां तारा की उपासना से बौद्धिक क्षमता और उच्च शिक्षा में सफलता, जबकि मां त्रिपुर सुंदरी की आराधना से व्यक्तित्व विकास, उत्तम स्वास्थ्य और रोजगार प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी प्रकार मां भुवनेश्वरी की साधना से भूमि, भवन और ऐश्वर्य की प्राप्ति, मां छिन्नमस्ता की उपासना से करियर में सफलता और पदोन्नति, मां त्रिपुर भैरवी की आराधना से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। मां धूमावती की साधना से अज्ञात भय और शत्रुओं से मुक्ति, मां बगलामुखी की कृपा से प्रतियोगी परीक्षाओं और न्यायिक मामलों में सफलता, मां मातंगी की आराधना से संतान सुख तथा मां कमला की साधना से धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति की मान्यता है।
15 जुलाई को होगी कलश स्थापना
पंडित मनोज दुबे के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर 3:14 बजे प्रारंभ होकर 15 जुलाई को सुबह 11:51 बजे तक रहेगी। उदयकालीन तिथि की मान्यता के आधार पर 15 जुलाई को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि का शुभारंभ किया जाएगा।
19 जुलाई को बनेगा सर्वार्थ सिद्धि और अमृत योग
19 जुलाई को सुबह 6:01 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग प्रारंभ होकर अगले दिन तड़के तक रहेगा। इसी दिन अमृत योग का भी संयोग बन रहा है, जिसे पूजा, जप और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
भड़ली नवमी पर रहेगा अबूझ मुहूर्त
16 जुलाई से गुरु तारा अस्त हो जाएगा, जिसके कारण सामान्य रूप से विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। हालांकि 22 जुलाई को आने वाली भड़ली नवमी को सनातन धर्म में अबूझ मुहूर्त माना गया है। ऐसे में इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ संस्कार बिना किसी अतिरिक्त मुहूर्त गणना के संपन्न किए जा सकेंगे।
