हनुमानगढ़। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड की ओर से वित्तपोषित एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र के अंतर्गत आयोजित सात दिवसीय हनी बी (मधुमक्खी पालन) प्रशिक्षण शिविर का मंगलवार को समापन हुआ। यह विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित नौवां प्रशिक्षण शिविर था। इस प्रशिक्षण में राजस्थान के श्रीगंगानगर, कोटा, सीकर, बूंदी, जोधपुर, जयपुर जिलों सहित अन्य क्षेत्रों से आए 25 किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, विद्यार्थियों एवं ग्रामीण युवाओं को मधुमक्खी पालन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को मधुमक्खियों की विभिन्न प्रजातियों, बॉक्स प्रबंधन, रानी मधुमक्खी संरक्षण, शहद संग्रहण, मोम उत्पादन, विपणन तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मधुमक्खी पालन कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि इससे परागण प्रक्रिया सशक्त होती है। समापन समारोह के मुख्य अतिथि श्री गुरु गोबिंद सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है। उन्होंने कहा कि नवाचार अपनाने वाले किसान ही भविष्य में सफल उद्यमी बन सकते हैं। उन्होंने शहद की गुणवत्ता को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि प्राकृतिक शुद्ध शहद का जमना उसकी गुणवत्ता का संकेत हो सकता है, न कि मिलावट का। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। शिविर समन्वयक डॉ. मंगला राम बाजिया ने बताया कि प्रतिभागियों को व्यवहारिक एवं तकनीकी दोनों स्तरों पर प्रशिक्षण दिया गया तथा उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी कराया गया, जिससे वे इस व्यवसाय को बेहतर तरीके से समझ सकें। उन्होंने कहा कि कम संसाधनों में भी मधुमक्खी पालन एक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा मधुमक्खी पालन किट देकर सम्मानित किया गया।
