-वेतन संरक्षण खत्म करने और वसूली कार्रवाई के विरोध में शिक्षक संघ का ज्ञापन
हनुमानगढ़। राजस्थान शिक्षक संघ (अम्बेडकर) जिला शाखा हनुमानगढ़ ने जिलाध्यक्ष दीपक बारोटिया के नेतृत्व में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं प्रमुख शासन सचिव, वित्त विभाग (नियम), राजस्थान सरकार, जयपुर के नाम ज्ञापन सौंपकर राजस्थान सेवा नियम (आरएसआर)-1951 के नियम 24 एवं 26 में संशोधन की मांग उठाई है। संघ ने कहा कि लगभग 75 वर्ष पुराने नियमों की वर्तमान परिस्थितियों में की जा रही व्याख्या से कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं और पदोन्नति व उच्च पदों पर चयनित होने वाले कार्मिक हतोत्साहित हो रहे हैं। ज्ञापन में बताया गया कि वित्त विभाग के 1 सितंबर 2025 एवं 2 जून 2026 के परिपत्रों के आधार पर पंचायतीराज, स्वायत्तशासी संस्थाओं एवं सार्वजनिक उपक्रमों से सीधी भर्ती के माध्यम से उच्च पदों पर चयनित कर्मचारियों को पूर्व सेवा का वेतन संरक्षण राजस्थान सेवा नियम 1951 के नियम 24 एवं 26 के तहत देय नहीं माना जा रहा है। इसके चलते शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता एवं प्रधानाध्यापक सहित विभिन्न पदों पर कार्यरत अनेक कर्मचारियों के वेतन का पुनर्निर्धारण किया जा रहा है तथा पूर्व में स्वीकृत वेतन संरक्षण के आधार पर की गई भुगतान राशि की वसूली की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। संघ ने कहा कि पंचायतीराज के शिक्षक व्यवहारिक रूप से शिक्षा विभाग के अधीन कार्य करते हैं। उनकी सेवा पुस्तिका, पदोन्नति, एसीपी, स्थानांतरण और पेंशन संबंधी कार्य शिक्षा विभाग द्वारा ही संचालित किए जाते हैं। ऐसे में उन्हें वेतन संरक्षण से वंचित करना न्यायोचित नहीं है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कर्मचारियों द्वारा पूर्व सेवाकाल में अर्जित अनुभव एवं वेतन स्तर की अनदेखी सेवा न्याय और समरूपता के सिद्धांतों के विपरीत है। राज्य सरकार पूर्व में विभिन्न आदेशों के माध्यम से इन संस्थाओं की सेवाओं को मान्यता दे चुकी है और 8 सितंबर 2022 के आदेश के जरिए उन्हें राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम, 2017 का लाभ भी प्रदान किया गया था। राजस्थान शिक्षक संघ (अम्बेडकर) ने पूर्व में सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत वेतन संरक्षण के आधार पर की जा रही वसूली को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय के रफीक मसीह मामले तथा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार के 2 मार्च 2016 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला दिया। संगठन ने मांग की कि अंतिम नीति निर्णय होने तक वेतन पुनर्निर्धारण और वसूली संबंधी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए तथा पहले से स्वीकृत वेतन संरक्षण के मामलों को यथावत रखा जाए। संघ ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-309 के तहत अधिसूचित राजस्थान सेवा नियम, 1951 के कई प्रावधान वर्तमान प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी परिस्थितियों के अनुरूप पुनर्समीक्षा की मांग करते हैं। बदलते प्रशासनिक ढांचे और कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए नियमों में व्यापक संशोधन समय की आवश्यकता बन गया है। राजस्थान शिक्षक संघ (अम्बेडकर) ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारी हित, प्राकृतिक न्याय और प्रशासनिक समरूपता को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन प्रभावित कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं वैधानिक माध्यमों से आंदोलन करने को बाध्य होगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान श्रीराम रांगेरा, धनराज लोहिया, बलवंत सिंह, महेंद्र पाल सिंह, जगदीश कड़ेला, ओम कताला, कैलाश, हीरालाल लोहिया, भोपाल मेहरड़ा, साहबराम सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
