टिब्बी। क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम सलेमगढ़ मसानी में सुहाग, आस्था और लोक संस्कृति का प्रतीक गणगौर पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। पर्व के अवसर पर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। इस दौरान सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर सोलह श्रृंगार के साथ ईसरजी (भगवान शिव) और गौर माता (माता पार्वती) की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना की, वहीं कुंवारी कन्याओं ने अच्छे वर की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की। पूजा-अर्चना के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से पारंपरिक राजस्थानी लोकगीत गाए, जिससे पूरा गांव सांस्कृतिक रंगों में सराबोर हो गया। शाम के समय महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश और ईसर-गौर की प्रतिमाएं रखकर गांव के मुख्य मार्गों से पारंपरिक सवारी निकाली। इस दौरान गांव में आपसी भाईचारे, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। ग्रामीणों ने बताया कि गणगौर पर्व हमारी प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे सलेमगढ़ मसानी में हर वर्ष पूरे उत्साह और एकजुटता के साथ मनाया जाता है। पूजा के समापन पर महिलाओं ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और प्रसाद का वितरण किया।
