इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में जेईई की तैयारी कर रहे एक 18 वर्षीय छात्र ने आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पढ़ाई और परीक्षा के दबाव को आत्महत्या का संभावित कारण माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार घटना शुक्रवार की है। लसूड़िया थाना क्षेत्र के स्कीम नंबर 78 में रहने वाले तन्मय यादव (18) ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। तन्मय इंजीनियरिंग की प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षा JEE की तैयारी कर रहा था। घटना के समय वह घर में अपने कमरे में था, जहां वह नियमित रूप से पढ़ाई करता था। लसूड़िया थाना प्रभारी तारेश सोनी ने बताया कि परिजनों को जब कमरे से कोई हलचल नहीं सुनाई दी तो उन्होंने दरवाजा खोलकर देखा। अंदर तन्मय फंदे पर लटका हुआ मिला। परिजन तुरंत उसे पास के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जिस कमरे में तन्मय पढ़ाई करता था, वहां लगे व्हाइट बोर्ड पर उसने ‘SORRY’ लिख रखा था। पुलिस इसे सुसाइड से पहले लिखा गया संदेश मानकर जांच कर रही है। फिलहाल घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तन्मय पढ़ाई और जेईई की तैयारी को लेकर काफी तनाव में था। परिवार के सदस्यों के अनुसार वह पिछले कुछ समय से पढ़ाई को लेकर दबाव महसूस कर रहा था। मामले में एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि छात्र के मामा रविंद्र मंडलोई से भी पूछताछ की गई है। उन्होंने बताया कि तन्मय ने उनसे कहा था कि शायद वह जेईई की तैयारी ठीक से नहीं कर पाएगा। इस पर उसे समझाने की कोशिश भी की गई थी। परिवार की जानकारी के अनुसार तन्मय की मां हेमलता यादव सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं, जबकि उसके पिता देवेंद्र यादव एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। उसका बड़ा भाई पिछले तीन वर्षों से विदेश में नौकरी कर रहा है। घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेज दिया था, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार और समाज को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें समय रहते भावनात्मक सहारा मिल सके।
