हनुमानगढ़। जंक्शन स्थित जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डिस्कॉम) के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में मंगलवार को हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले से जुड़े विभिन्न संगठनों के कर्मचारी एकत्रित हुए। बैठक में सभी संगठनों ने मिलकर संयुक्त संघर्ष समिति के गठन की घोषणा की और निजीकरण के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया। बैठक में निर्णय लिया गया कि अलग-अलग संगठनों की बजाय अब सभी कर्मचारी एक मंच पर आकर साझा एजेंडे के तहत निजीकरण का विरोध करेंगे। समिति में इंजीनियर्स, इंटक, बीएमएस सहित अन्य कर्मचारी संगठन शामिल हैं। 12 सदस्यों की कार्यसमिति गठित की गई है, जो निजीकरण विरोधी रणनीति तैयार करेगी। यह एजेंडा हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर दोनों जिलों में समान रूप से लागू किया जाएगा। संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक अनिल चलका ने बताया कि दोनों जिलों के सभी संगठनों को मिलाकर 12 पदाधिकारियों की टीम बनाई गई है, जो निजीकरण के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में धीरे-धीरे निजीकरण की प्रक्रिया बढ़ रही है और बीकानेर, अजमेर, भरतपुर व कोटा जैसे जिलों में हालात खराब हो चुके हैं। वहां कंपनियां न जनप्रतिनिधियों की सुनती हैं और न ही उपभोक्ताओं की, जिससे आम जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर क्षेत्र जोधपुर डिस्कॉम का सबसे अधिक राजस्व देने वाला और कम छीजत वाला क्षेत्र है। यहां हर घर तक पहुंच आसान है और विभाग अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। ऐसे में निजीकरण का कोई औचित्य नहीं है। अगर यहां भी निजीकरण हुआ तो घाटे की भरपाई कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है।

चलका ने बताया कि दोनों जिलों में कार्यरत लगभग 99 प्रतिशत अधिकारी-कर्मचारी स्थानीय हैं, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर निगम को मजबूत बनाया है। निजीकरण से उनका भविष्य भी असुरक्षित हो जाएगा। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और यह न समझें कि निजीकरण से उन्हें लाभ होगा। उन्होंने बीकानेर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां निजी कंपनियों के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार बाहर से आए कर्मचारी उपभोक्ताओं की भाषा तक नहीं समझ पाते और शिकायतों का समाधान नहीं हो पाता।

समिति ने आशंका जताई कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर अधिकारी नहीं मिलेंगे और जवाबदेही भी कम हो जाएगी। साथ ही, सरकार द्वारा दी जा रही 150 यूनिट मुफ्त बिजली जैसी सुविधाएं भी बंद हो सकती हैं। संयुक्त संघर्ष समिति ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे आगे आकर बिजली निगम को निजीकरण से बचाने में कर्मचारियों का साथ दें। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि दो दिन बाद पुन: बैठक कर आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी और बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसमें दोनों जिले एक साथ भाग लेंगे।
