– दस्त, तेज बुखार, वायरल संक्रमण, टायफाइड और पीलिया के मामले बढ़े, विशेषज्ञ बोले-सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय
हनुमानगढ़। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान का असर अब बच्चों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में गर्मी जनित बीमारियों से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। विशेष रूप से दस्त, तेज बुखार, वायरल संक्रमण, टायफाइड, पीलिया और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं के मामले सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चों को गंभीर रूप से बीमार कर सकती है, इसलिए अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रमाशंकर आसोपा ने बताया कि वर्तमान में तेज गर्मी के कारण खाद्य पदार्थांे में जल्दी बैक्टीरिया और अन्य कीटाणु विकसित हो जाते हैं। ऐसे संक्रमित खाद्य पदार्थांे और दूषित पानी के सेवन से बच्चों में जलजनित और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि गर्मी के मौसम में दस्त, उल्टी, वायरल बुखार, टायफाइड और पीलिया जैसे रोगों के मरीज अधिक संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को धूप और लू से बचाना सबसे जरूरी है। यदि किसी कारणवश बच्चों को घर से बाहर ले जाना पड़े तो उन्हें सिर पर टोपी पहनाकर रखें तथा गर्दन पर सूती कपड़ा रखें। बच्चों को ऐसे सूती कपड़े पहनाने चाहिए जो शरीर को पूरी तरह ढक सकें, ताकि तेज धूप और गर्म हवा का सीधा असर शरीर पर न पड़े। बाहर निकलते समय छाते का उपयोग भी लाभदायक रहता है। डॉ. आसोपा ने कहा कि गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। बच्चों को नियमित अंतराल पर पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना चाहिए। इसके अलावा नींबू पानी, केरी का पानी और नमकीन छाछ जैसे घरेलू पेय पदार्थ भी शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। जितना अधिक शरीर हाइड्रेट रहेगा, गर्मी का प्रभाव उतना ही कम होगा। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बच्चों को बाहर न ले जाएं। यदि किसी जरूरी काम से बाहर जाना हो तो पहले पर्याप्त पानी पिलाएं और गर्मी से बचाव के सभी उपाय अपनाएं। लंबे सफर के दौरान बीच-बीच में छायादार स्थान पर रुककर आराम करना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में बच्चों को तेज बुखार आने की शिकायत भी आम है। ऐसे में बच्चे को सामान्य पानी से स्पंजिंग कर सकते हैं और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पैरासिटामोल दी जा सकती है। साथ ही तरल पदार्थांे का सेवन बढ़ाना चाहिए। यदि बुखार लंबे समय तक बना रहे तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।
जलजनित रोग होने का खतरा
डॉ. आसोपा ने बाहर मिलने वाले खाद्य पदार्थांे से भी सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खुले में रखी खाद्य सामग्री कुछ समय बाद संक्रमित हो जाती है और उसके सेवन से जलजनित रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चों को ताजा और स्वच्छ भोजन ही देना चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि किसी बच्चे या व्यक्ति में अत्यधिक सुस्ती, शरीर का असामान्य रूप से गर्म होना, पसीना बंद होना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे हीट स्ट्रोक का संकेत माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र से संपर्क करना चाहिए। प्राथमिक उपचार के तौर पर प्रभावित व्यक्ति को छायादार स्थान पर बैठाना, कपड़े ढीले करना, हवा लगने देना और सामान्य पानी से शरीर को ठंडा करने का प्रयास करना चाहिए। डॉ. आसोपा के अनुसार अस्पतालों में इन दिनों गर्मी जनित बीमारियों से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतते हुए बच्चों को गर्मी, दूषित भोजन और पानी से बचाना चाहिए, ताकि गंभीर बीमारियों से उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।
