जोधपुर। जोधपुर में सोमवार को महाराजा जसवंत सिंह की प्रतिमा अनावरण समारोह के दौरान राजनीतिक अनुभव, छात्र राजनीति और कार्यकर्ताओं के योगदान पर दिलचस्प संवाद देखने को मिला। कार्यक्रम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने छात्रसंघ को लोकतंत्र की फुलवारी बताते हुए कहा कि इसे सींचने वाले ओम माथुर हैं। उन्होंने मंच पर मौजूद नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि यहां कई तरह के पुष्प बैठे हैं। कुछ मेरी तरह पूर्व हो गए हैं, कुछ सतीश पूनिया जैसे अभूतपूर्व हो गए हैं, कुछ बाबू सिंह की तरह पूरी तरह खिल गए हैं और कुछ अरविंद सिंह जैसे अभी खिलना बाकी है। राठौड़ की टिप्पणी पर सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि “हमारे यहां पुष्प खिलते ही रहते हैं। मैं तो उस पहाड़ी क्षेत्र से हूं, जहां पत्थरों पर भी पुष्प खिल जाते हैं। इसलिए राजेंद्र राठौड़ जी, आप इस दुविधा से दूर हो जाइए, यहां पुष्प खिलते रहेंगे।” ओम माथुर ने अपने संबोधन में कहा कि लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन यही संघर्ष व्यक्ति को अधिक सक्षम और परिपक्व बनाता है। अपने संबोधन में राजेंद्र राठौड़ ने ओम माथुर के संगठनात्मक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि जयपुर से आते समय उन्होंने “ओम पेट्रोल पंप एंड फ्यूल सेंटर” का बोर्ड देखा। पूछने पर पता चला कि इसके पीछे ओम माथुर की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि ओम माथुर ने अपने समय में 250 से अधिक लोगों को पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियां दिलवाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम किया। इस पर ओम माथुर ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “आपको भी तो दिया है।” इस पर राठौड़ ने जवाब दिया कि जयपुर के कानोता स्थित “पराक्रम पेट्रोल पंप” भी उन्हें ओम माथुर की कृपा से ही मिला। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने भी ओम माथुर और राजेंद्र राठौड़ की राजनीतिक यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि ओम माथुर उनकी राजनीति की पहली पाठशाला के गुरु हैं, जिन्होंने उन्हें राजनीति में चलना सिखाया। वहीं, राजेंद्र राठौड़ से भी उन्होंने बहुत कुछ सीखा। पूनिया ने कहा कि भैरोंसिंह शेखावत के बाद यदि कोई राजनीति की पाठशाला है तो वह राजेंद्र राठौड़ हैं। छात्रों को संबोधित करते हुए सतीश पूनिया ने कहा कि केवल कागज का एक टुकड़ा किसी का भविष्य तय नहीं करता। डिग्री का उद्देश्य व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़ा करना होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से ऐसे संस्कार अपनाने का आह्वान किया, जो समाज में समरसता, भाईचारा और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाएं।
