– 70 वर्षीय किसान ने कलक्टर को सौंपा आठवां ज्ञापन, न्याय नहीं मिला तो मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने की चेतावनी
हनुमानगढ़। मक्कासर गांव निवासी 70 वर्षीय किसान रामनारायण पुत्र जोतराम ने शुक्रवार को जिला कलक्टर को आठवां ज्ञापन सौंपकर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज 16 फीट चौड़े स्वीकृत रास्ते से अतिक्रमण हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो माह से लगातार प्रशासन को शिकायतें देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला तो मजबूर होकर जयपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना देंगे। रामनारायण ने बताया कि उनकी खातेदारी कृषि भूमि चक नंबर 5 के एनजे, पटवार हल्का मक्कासर में स्थित है। वहीं उनकी ढाणी है। राजस्व अभिलेखों में उनकी ढाणी तक पहुंचने के लिए 16 फीट चौड़ा स्वीकृत रास्ता दर्ज है, जो गांव और शहर तक आने-जाने का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त रास्ते पर अतिक्रमण कर उसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इससे परिवार को रोजाना आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कृषि कार्यांे में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर, कृषि यंत्र और अन्य वाहन ढाणी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है तथा रास्ते से आवागमन लगभग असंभव हो जाता है। रामनारायण ने आरोप लगाया कि काश्तकार सुभाष ने करीब एक बीघा रास्ते को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है। उन्होंने बताया कि जब रास्ता बंद किया जा रहा था, तब प्रशासन और पुलिस को सूचना दी गई थी। पुलिस मौके पर पहुंची भी, लेकिन उसके जाने के बाद दोबारा रास्ता बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वे 70 वर्ष के वृद्ध हैं और उनकी पत्नी हृदय रोग से पीड़ित हैं। परिवार में छोटे-छोटे पोते-पोतियां हैं, जो विद्यालय आने-जाने के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। रास्ता बंद होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस तक घर नहीं पहुंच सकती। उन्होंने कहा कि यदि रास्ता बंद रहने के कारण उनके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी अतिक्रमणकर्ता और प्रशासन की होगी। ज्ञापन में जिला प्रशासन से मांग की गई है कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज 16 फीट चौड़े रास्ते को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना करने वाले अतिक्रमणकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। रामनारायण ने चेतावनी दी कि यदि लंबे समय से लंबित इस मामले में शीघ्र न्याय नहीं मिला तो वे मजबूर होकर जयपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना देंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
