– कृषि अधिकारियों को कलक्ट्रेट कार्यालय में नहीं जाने दिया, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की
हनुमानगढ़। गेहूं खरीद में कथित अनियमितताओं और अटल भूजल योजना के तहत डिग्गियों के लंबित अनुदान की मांग को लेकर शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने जिला कलक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान सभी किसानों के जिला कलक्टर से मुलाकात करने की बात को लेकर पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को संभाला। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों को भी कलक्ट्रेट कार्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया। किसानों को एक साथ जिला कलक्टर से मिलने की अनुमति नहीं मिलने पर वे कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जंक्शन थाना प्रभारी रामचंद्र कस्वां पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों से समझाइश कर माहौल शांत कराया। बाद में किसानों के प्रतिनिधिमंडल की जिला कलक्टर के साथ कलक्ट्रेट सभागार में वार्ता हुई। वार्ता के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। पहले ज्ञापन में किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद में बड़े स्तर पर गड़बड़ी होने का आरोप लगाया। किसानों का कहना था कि इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल था, जिस पर राज्य सरकार ने 150 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की भी घोषणा की थी। लेकिन कथित मिलीभगत के कारण अनेक किसानों का गेहूं समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा गया, जिससे वे बोनस से भी वंचित रह गए। किसानों ने मांग की कि गेहूं खरीद में अनियमितता करने वाले जिम्मेदार लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएं तथा जिन किसानों का गेहूं समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा गया, उन्हें 2735 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान कर बोनस का लाभ दिया जाए। साथ ही मंडियों में पड़े गेहूं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। किसानों ने आरोप लगाया कि अप्रैल माह से लगातार शिकायतें करने के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। दूसरे ज्ञापन में किसानों ने अटल भूजल योजना के तहत वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में निर्मित डिग्गियों का अनुदान अब तक नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। किसानों का कहना है कि योजना के तहत प्रत्येक किसान को करीब तीन लाख रुपए का अनुदान मिलना था, लेकिन आज तक एक भी किसान के खाते में राशि नहीं पहुंची। किसानों ने बताया कि डिग्गियों के निर्माण के लिए उन्होंने ब्याज पर ऋण लिया था और अनुदान में देरी के कारण वे आर्थिक संकट में फंस गए हैं तथा कई किसानों पर ब्याज का बोझ एक लाख रुपए से अधिक हो चुका है। किसानों ने मांग की कि डिग्गियों का लंबित अनुदान ब्याज सहित जल्द जारी किया जाए, ताकि किसान कर्ज के बोझ से राहत पा सकें। संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि गेहूं खरीद की जांच, बोनस भुगतान और डिग्गियों के अनुदान का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो किसान आगामी सप्ताह बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। इस मौके पर रेशमसिंह माणुका, रायसाहब मल्लड़खेड़ा, सुभाष गोदारा, लखवीर सिंह, रविन्द्र सिंह, नक्षत्र सिंह, गुरदित्ता सिंह, अमरसिंह, अमरचन्द, गुरसेवक सिंह सहित कई किसान मौजूद रहे।
278 आढ़तिये व 706 किसानों की पहचान
कृषि अधिकारियों ने बताया कि गिरदावरी का दुुरुपयोग करने व बटाईदार के नाम से अवैध गेहूं बेचान की शिकायतों की जांच की जा रही है। ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। अब तक करीब 350 प्रकरणों की जांच की जा चुकी है। 706 किसानों व 278 से अधिक आढ़तियों की पहचान की गई है। इन आढ़तियों के लाइसेंस सस्पेंशन के लिए मंडी समिति की ओर से आरोप पत्र दिए जा रहे हैं। अब तक 105 आरोप पत्र दिए जा चुके हैं।
