हनुमानगढ़। न्याय की आस में पिछले तीन दशकों से विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट रहे वनकर्मी मनवीर सिंह पुत्र दुल्लाराम मेघवाल निवासी ग्राम डबली कलां (तहसील टिब्बी) ने आखिरकार हताश होकर मंगलवार से उप वन संरक्षक कार्यालय के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनके समर्थन में भीम आर्मी भारत एकता मिशन के कार्यकर्ता व मनवीर सिंह के परिवार की महिलाओं सहित पूरा परिवार भी धरने पर बैठा। भीम आर्मी भारत एकता मिशन जिलाध्यक्ष मदनलाल मेघवाल ने कहा कि प्रशासन के अधिकारियों से परेशान मनवीर सिंह 32 वर्षांे से न्याय के लिए भटक रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार गरीब मजदूरों और श्रमिकों की बात करती है, लेकिन हकीकत यह है कि एक साधारण कर्मचारी 32 साल से न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है और कोई सुनवाई नहीं हो रही। जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और बकाया वेतन सहित सेवा में पुन: बहाली नहीं की जाएगी, तब तक यह भूख हड़ताल जारी रहेगी। मनवीर सिंह के अनुसार उसका संघर्ष वर्ष 1992 से निरंतर सेवा मान्यता और वेतन भुगतान को लेकर है। उन्होंने बताया कि श्रम न्यायालय, अतिरिक्त श्रम आयुक्त और यहां तक कि उच्च न्यायालय, जोधपुर तक ने उनके पक्ष में कई बार निर्णय दिए, लेकिन वन विभाग ने अब तक इन आदेशों की विधिवत पालना नहीं की। श्रम न्यायालय श्रीगंगानगर की ओर से पारित आदेश में उन्हें वेतन सहित बहाल करने और सेवा को 1 जनवरी 1992 से निरंतर मानने का आदेश दिया था। इसके बावजूद विभाग ने आज तक न तो उन्हें सेवा में पुन: लिया और न ही बकाया वेतन का भुगतान किया।

मनवीर सिंह ने बताया कि विभागीय अधिकारियों ने उनकी मांगों को टालने के लिए झूठे मुकदमे तक दर्ज कराए। न्यायालय ने उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त घोषित कर दिया। एक ईमानदार गरीब कर्मचारी के साथ विभाग ने अन्याय की हद पार कर दी है। 32 साल से न्याय की लड़ाई लड़ते-लड़ते अब उसके जीवन की सारी पूंजी और उम्मीद खत्म हो गई है। अब न्याय या मृत्यु, यही दो विकल्प बचे हैं। मनवीर सिंह ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, श्रम मंत्रालय, मुख्यमंत्री, वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक, यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय तक गुहार लगाई, परंतु आज तक किसी स्तर पर उन्हें राहत नहीं मिली। मनवीर सिंह ने कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अपनी अंतिम सांस तक यही अनशन स्थल पर डटे रहेंगे। इस मौके पर मदनलाल, विनोद जोइया, वेद मक्कासर, रतीराम, सुनील मेघवाल, संदीप, चन्द्रकला, शारदा, ममता, सरोज, गुड्डी देवी मौजूद रहे।
