हनुमानगढ़। दिवंगत किसान भंवरनाथ के लंबित फसल बीमा क्लेम सहित विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को एचडीएफसी बैंक की मुंडा शाखा के बाहर केसीसी धारक किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने बैंक प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि बैंक की लापरवाही और कथित अनियमितताओं के कारण कई किसान आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। धरने पर बैठे किसानों ने आरोप लगाया कि बैंक की ओर से सुपर विजन चार्ज के नाम पर केसीसी खातों से प्रतिवर्ष दो हजार से 15 हजार रुपए तक की राशि काटी जाती है। उनका कहना है कि ऋण स्वीकृत करते समय दस्तावेज अंग्रेजी भाषा में होने के कारण अधिकांश किसानों को इन शर्तांे की पूरी जानकारी नहीं दी जाती, जिससे वे अनजाने में अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करने को मजबूर हो जाते हैं। किसानों ने बताया कि धीरदेसर तहसील पल्लू निवासी किसान भंवरनाथ पुत्र रामनाथ ने एचडीएफसी बैंक मुंडा शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण लिया था, जिसके साथ बीमा पॉलिसी भी की गई थी। किसान की 28 फरवरी 2025 को हृदयाघात से मृत्यु हो गई। परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित सभी आवश्यक दस्तावेज बैंक को उपलब्ध करवा दिए, लेकिन इसके बावजूद बीमा क्लेम का भुगतान नहीं हुआ। किसानों का आरोप है कि क्लेम निरस्त होने के बाद भी बैंक कर्मचारी मृतक किसान के परिजनों से ऋण वसूली का दबाव बना रहे हैं तथा ब्याज सहित राशि जमा नहीं कराने पर जमीन कुर्क करने की चेतावनी दे रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि खरीफ-2025 और रबी-2026 के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम समय पर काट लिया गया, लेकिन कई किसानों के बीमा की पोर्टल पर समय पर एंट्री नहीं की गई। इसके चलते अनेक किसान बीमा क्लेम से वंचित रह गए। किसानों ने मांग की कि जिन किसानों को बैंक की कथित लापरवाही के कारण नुकसान हुआ है, उनकी भरपाई बैंक स्वयं करे।
ब्याज दरों पर भी उठाए सवाल
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि केसीसी ऋण देते समय 10 प्रतिशत ब्याज का आश्वासन दिया गया था, जबकि बाद में 15 से 20 प्रतिशत तक ब्याज वसूला जा रहा है। किसानों का कहना है कि इससे वे लगातार कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं और सरकारी योजनाओं का उद्देश्य भी प्रभावित हो रहा है। किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो बैंक के खिलाफ आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा शाखा का कामकाज प्रभावित करने की रणनीति अपनाई जाएगी। उनका कहना है कि जब तक दिवंगत किसान भंवरनाथ के परिवार को न्याय नहीं मिलता और अन्य किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
