– उत्कृष्ट पोस्टर, काउंसलिंग और सेवा देने वाले चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ व विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
हनुमानगढ़। टाउन स्थित राजकीय जिला चिकित्सालय के बाल एवं नवजात शिशु रोग विभाग (पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी) की ओर से विश्व स्तनपान सप्ताह-2026 का शुक्रवार को जागरूकता एवं पुरस्कार वितरण समारोह के साथ समापन किया गया। एमसीएच भवन की तीसरी मंजिल पर आयोजित कार्यक्रम में सप्ताहभर विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेडिकल स्टूडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान जिला अस्पताल में पोस्टर प्रतियोगिता, वार्डांे में माताओं की काउंसलिंग, जागरूकता सत्र और विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। समापन समारोह में इन गतिविधियों के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित कर स्तनपान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। इस मौके पर बाल रोग एवं नवजात शिशु विशेषज्ञ डॉ. हरविन्द्र सिंह ने कहा कि वर्ष 1992 से हर साल 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य नवजात शिशुओं को जन्म के बाद समय पर मां का दूध उपलब्ध कराना और समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना है। उन्होंने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। इसके बाद पूरक आहार शुरू किया जा सकता है, लेकिन दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखना बच्चे के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत लाभदायक है। डॉ. हरविन्द्र सिंह ने कहा कि मां का पहला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे का पहला टीका माना जाता है, क्योंकि यह रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद समाज में आज भी कई भ्रांतियां हैं। कई बार ऑपरेशन से प्रसव होने या मां को दर्द होने जैसी परिस्थितियों में नवजात को स्तनपान नहीं कराया जाता, जबकि ऐसा करना बच्चे के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने माताओं और परिजनों से अपील करते हुए कहा कि शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराया जाना चाहिए तथा शुरुआती गाढ़े दूध को किसी भी स्थिति में नहीं फेंकना चाहिए। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है और उसका मानसिक विकास भी बेहतर होता है। उन्होंने यह भी बताया कि स्तनपान केवल शिशु ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है। इससे गर्भावस्था के दौरान बढ़ा वजन कम करने में मदद मिलती है तथा स्तन कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर का खतरा भी कम होता है। समापन समारोह में उपस्थित चिकित्सकों ने कहा कि स्तनपान को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर करना समय की आवश्यकता है। प्रत्येक परिवार और समुदाय को इस दिशा में जागरूक होकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर नवजात को जन्म के तुरंत बाद मां का अमृत समान दूध मिल सके, ताकि स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी का निर्माण हो सके।
