– यूनिवर्सिटी की कमेटी ने की वार्ता, लिखित सहमति की मांग पर अड़े रहे छात्र, हॉस्टल, लैब व लाइब्रेरी शुरू करने की भी मांग
हनुमानगढ़। कृषि महाविद्यालय के नए भवन को जिला प्रशासन की ओर से चुनाव के लिए अधिग्रहित किए जाने से नाराज छात्र-छात्राओं का टाउन स्थित कृषि महाविद्यालय के पुराने भवन के समक्ष चल रहा बेमियादी धरना सोमवार को छठे दिन भी जारी रहा। छात्र-छात्राओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। वहीं, सोमवार को आयोजित पेपर का भी छात्र-छात्राओं ने बहिष्कार कर दिया। सोमवार को यूनिवर्सिटी की ओर से गठित कमेटी कृषि महाविद्यालय पहुंची और धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं से वार्ता कर समझाइश का प्रयास किया। हालांकि छात्र-छात्राएं अपनी मांगों के संबंध में लिखित सहमति दिए जाने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। धरने पर बैठे छात्र गणेश भादू ने कहा कि छात्र-छात्राओं की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं और जिला प्रशासन तथा कॉलेज प्रशासन की ओर से उनकी सुनवाई नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि नए भवन को चुनाव के लिए अधिग्रहित करने के बाद छात्र-छात्राओं को वापस पुराने और जर्जर भवन में भेज दिया गया है। उनकी मांग है कि नए भवन का अधिग्रहण रद्द कर कृषि महाविद्यालय को नए भवन में शिफ्ट किया जाए। इसके साथ ही लैब और लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध करवाने तथा पिछले करीब एक साल से बंद पड़े हॉस्टल शुरू करने की मांग भी की जा रही है। गणेश भादू ने आरोप लगाया कि कॉलेज डीन की ओर से केवल आश्वासन दिया जा रहा है और मांगों के समाधान के लिए 20 दिन का समय मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राएं अब केवल आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगे। जब तक मांगों के संबंध में कॉलेज प्रशासन की ओर से लिखित में निर्णय नहीं दिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। कांग्रेस कमेटी के उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मारवाल ने धरने को समर्थन देते हुए कहा कि छात्र-छात्राएं अपनी जायज मांगों को लेकर कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि महाविद्यालय के नए भवन को चुनाव के लिए अधिग्रहित कर छात्र-छात्राओं को पुराने भवन में भेजना उचित नहीं है। पुराने भवन में सभी छात्र-छात्राओं के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भविष्य में किसी प्रकार का हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि करीब एक साल से तैयार छात्रावास शुरू नहीं किए जाने के कारण दूर-दराज से आने वाले छात्र-छात्राओं को किराए के मकानों में रहना पड़ रहा है। सोमवार को छात्र-छात्राओं का पेपर होने के बावजूद प्रशासन की ओर से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रोहित जावा ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी की ओर से गठित कमेटी की ओर से छात्र-छात्राओं को समझाने के नाम पर केवल आश्वासन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक नए कृषि महाविद्यालय भवन में कक्षाएं शुरू करने सहित अन्य मांगों के संबंध में कॉलेज प्रशासन लिखित में निर्णय नहीं देता, तब तक वे छात्र-छात्राओं के साथ धरने पर बैठे रहेंगे। रोहित जावा ने चेतावनी दी कि छात्र-छात्राओं के सब्र का बांध टूटने की स्थिति में है। प्रशासन छात्र-छात्राओं को उग्र आंदोलन के लिए मजबूर न करे और उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय ले।
