- 27 से 31 अगस्त तक होंगे नामांकन, टिकट वितरण और बागियों पर रहेगी सबकी नजर
हनुमानगढ़। नगरपरिषद चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही शहर की राजनीति पूरी तरह सक्रिय हो गई है। 60 वार्डों वाले इस चुनाव में दावेदारों की संख्या वार्डों से कई गुना अधिक मानी जा रही है। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल अपने-अपने स्तर पर प्रत्याशी चयन की तैयारियों में जुटे हैं, जिससे चुनावी समीकरण लगातार बदलते नजर आ रहे हैं। सबसे दिलचस्प स्थिति भाजपा और निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल के बीच बनी है। विधानसभा में भाजपा सरकार को समर्थन देने वाले बंसल ने नगरपरिषद चुनाव में सभी 60 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार समर्थित उम्मीदवारों की सूची लगभग अंतिम चरण में है। ऐसे में स्थानीय चुनाव में भाजपा और बंसल के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
भाजपा में टिकट के लिए बढ़ी हलचल
भाजपा ने सभी वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारने के संकेत दिए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि उम्मीदवारों का चयन सर्वे और स्थानीय फीडबैक के आधार पर किया जाएगा। जिलाध्यक्ष प्रमोद डेलू और वरिष्ठ नेता अमित चौधरी प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी कार्यालय और नेताओं के आवास पर टिकट मांगने वालों की लगातार भीड़ देखी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण के बाद असंतुष्ट दावेदारों को साथ बनाए रखने की होगी। बड़ी संख्या में दावेदार होने के कारण बागी उम्मीदवारों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
बंसल के सामने ताकत साबित करने की चुनौती
निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल के लिए यह चुनाव उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ की परीक्षा माना जा रहा है। यदि उनके समर्थित उम्मीदवार पर्याप्त संख्या में जीत दर्ज करते हैं और बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, तो स्थानीय राजनीति में उनकी स्थिति और मजबूत होगी। वहीं कई वार्डों में भाजपा के वोट प्रभावित होने की स्थिति भी चुनावी परिणामों को रोचक बना सकती है।
कांग्रेस संगठन मजबूत करने की कोशिश में
कांग्रेस फिलहाल संगठनात्मक स्तर पर अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रही है। पार्टी के सामने मजबूत उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने के साथ-साथ आंतरिक गुटबाजी से निपटने की चुनौती भी है। पूर्व मंत्री चौधरी विनोद कुमार के समर्थकों की भूमिका टिकट वितरण में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि संगठन और गुटों के बीच संतुलन नहीं बना तो कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नामांकन के पांच दिन होंगे निर्णायक
नगरपरिषद चुनाव के लिए 27 से 31 अगस्त तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इन पांच दिनों में टिकटों की घोषणा, नेताओं की बैठकों, नाराज दावेदारों की मनुहार और संभावित बगावतों पर सभी की नजर रहेगी। राजनीतिक दलों के लिए यही अवधि चुनावी रणनीति तय करने में सबसे अहम मानी जा रही है। हनुमानगढ़ नगरपरिषद चुनाव में इस बार मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल की सक्रियता ने चुनाव को त्रिकोणीय राजनीतिक संघर्ष का स्वरूप दे दिया है। अब अंतिम फैसला 60 वार्डों के मतदाता करेंगे, जिनके वोट पर नगरपरिषद की नई तस्वीर तय होगी।
