हनुमानगढ़। राजस्थान गौ सेवा समिति, जिला इकाई की ओर से गौशालाओं में संरक्षित गोवंश की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर गुरुवार को जिला गौशाला विकास समिति के बैनर तले मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। समिति ने बताया कि गोपालन मंत्री, विभागीय निदेशक एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर पर पूर्व में भी समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसके विरोध में समिति की ओर से 9 अक्टूबर को जयपुर में ‘गो अधिकार हुंकार सभा’ आयोजित की जाएगी। समिति जिलाध्यक्ष महेन्द्र कुमार ने कहा कि वर्तमान में गौशालाओं को नौ माह की सहायता राशि दी जा रही है, जबकि गोवंश के चारा-पानी एवं देखभाल पर लगातार खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में सहायता अवधि को बढ़ाकर 12 माह किया जाए। समिति के अनुसार, चारे की बढ़ती कीमतों के कारण गौशालाओं को शेष खर्च जनसहयोग एवं दानदाताओं से जुटाना पड़ रहा है। ज्ञापन में प्रदेश के अकाल प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पशु शिविर एवं चारा डिपो स्वीकृत कर किसानों को चारा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। समिति का कहना है कि वर्षा की कमी और चारे की महंगाई के कारण किसानों के लिए गोवंश का पालन मुश्किल हो रहा है। समिति ने महालेखाकार की ओर से गौशालाओं के अंकेक्षण के दौरान 12-अंकीय टैग एवं ऑनलाइन मैपिंग से जुड़ी कमियों के आधार पर जारी रिकवरी आदेश समाप्त करने की मांग की। समिति का आरोप है कि टैग एवं ऑनलाइन मैपिंग से संबंधित प्रक्रिया में विभागीय स्तर की जिम्मेदारियां होने के बावजूद गौशालाओं को रिकवरी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है तथा सहायता राशि रोकने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा सहायता राशि समय पर जारी करने, ताकि गौशालाएं फसल कटाई के समय स्थानीय स्तर पर कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण चारा खरीद सकें, की मांग की गई है। समिति ने गोचर भूमि का सीमांकन, अतिक्रमण हटाने, तारबंदी एवं ट्रेंच निर्माण, घास-चारा उत्पादन, जल संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए दीर्घकालीन योजना बनाने तथा पात्र गौशालाओं को नियमानुसार भूमि आवंटित करने की मांग भी रखी। समिति ने मुख्यमंत्री से सभी समस्याओं पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। समिति के अनुसार 9 अक्टूबर को जयपुर में होने वाली ‘गो अधिकार हुंकार सभा’ में संत-महात्माओं के मार्गदर्शन में गोभक्त, गोसेवक एवं गौशाला संचालक हिस्सा लेंगे।
