– निजी स्कूल का संबद्धता प्रमाण पत्र लेने के लिए कम समय देने और कार्रवाई की चेतावनी का मामला
हनुमानगढ़। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान विद्यालय शिक्षा) ने मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, समग्र शिक्षा रावतसर की ओर से दो राजकीय विद्यालयों के प्राचार्यांे को जारी कारण बताओ नोटिस पर आपत्ति जताई है। संगठन के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को जिलाध्यक्ष मनमोहन शर्मा के नेतृत्व में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर संज्ञान लेने और भविष्य में इस तरह की कार्रवाई से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। जिलाध्यक्ष मनमोहन शर्मा के अनुसार सीबीईओ कार्यालय रावतसर ने 14 अक्टूबर को जारी नोटिस के माध्यम से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दनियासर और धांधुसर के प्राचार्यांे को निजी स्कूल एमडीडी किड्स केयर स्कूल, रावतसर का संबद्धता प्रमाण पत्र प्राप्त करने का कार्य सौंपा था।

इस कार्य के लिए 12 अक्टूबर तक की समय सीमा दी गई और इसके तुरंत बाद सीसीए नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए। मनमोहन शर्मा ने कहा कि संबद्धता प्रमाण पत्र प्राप्त करने या प्रशासनिक समन्वय से जुड़े इस कार्य के लिए सीबीईओ कार्यालय के स्थानीय कार्मिकों अथवा नजदीकी विद्यालय के स्टाफ की सेवाएं ली जा सकती थीं। इसके बजाय कार्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित विद्यालयों के प्राचार्यांे को जिम्मेदारी देना अव्यावहारिक है। इससे समय और सरकारी संसाधनों की बर्बादी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राचार्यांे ने दूरभाष के माध्यम से सीबीईओ को व्यावहारिक कठिनाइयों और वस्तुस्थिति से अवगत कराया था, लेकिन इसके बावजूद उनकी परिस्थितियों को समझने के बजाय नोटिस जारी कर दिए गए। संगठन ने इसे अनुचित दबाव बनाने वाला रवैया बताया।
पहले स्थिति स्पष्ट करने की मांग
संगठन का कहना है कि राजकीय विद्यालयों के प्राचार्यांे पर शैक्षणिक, प्रशासनिक और विभागीय दायित्वों का पहले से ही काफी कार्यभार रहता है। ऐसे में कम समय सीमा निर्धारित कर वस्तुस्थिति जाने बिना अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देना मानसिक तनाव और रोष का कारण बनता है। संगठन के अनुसार, किसी कार्य में देरी होने पर सीधे कारण बताओ नोटिस जारी करने के बजाय पहले संबंधित कार्मिक से स्थिति और प्रगति रिपोर्ट मांगी जानी चाहिए। मनमोहन शर्मा ने मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। साथ ही भविष्य में प्राचार्यांे और शैक्षणिक स्टाफ के विरुद्ध जल्दबाजी में इस तरह के नोटिस जारी नहीं करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया।
