चारणवासी। लेह-लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए 21 जाट रेजिमेंट के जवान सुरेश कुमार ज्याणी का पार्थिव शरीर बुधवार को उनके पैतृक गांव फेफाना पहुंचा। शहीद की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। भादरा मोड़ से लेकर गांव तक 16 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। रास्ते में रामसरा और चक 16 जेएसएन सहित विभिन्न ढाणियों में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर शहीद को नमन किया। पूरा क्षेत्र ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद सुरेश अमर रहे’ के नारों से गुंजायमान रहा। बताते चलें कि शहीद सुरेश कुमार ज्याणी लेह-लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में तैनात थे, जहां तापमान -45 डिग्री सेल्सियस होने से अत्यधिक ठंड के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें इलाज के लिए दिल्ली स्थित आर्मी बेस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां पिछले 12 दिनों से ईलाज चल रहा था मंगलवार तड़के करीब 3 बजे इस वीर योद्धा ने अंतिम सांस ली और मां भारती की गोद में सदा के लिए सो गए।

ढाई साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
शहीद का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ गांव के श्मशान घाट में किया गया। सबसे हृदयविदारक पल तब आया जब शहीद के ढाई वर्षीय बेटे हार्दिक ने अपने पिता की पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। इस दृश्य को देख वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें भर आईं। शहीद के पिता रघुवीर सिंह ने भारी मन लेकिन गर्व के साथ कहा कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है, जिसने देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
सैन्य सम्मान और ‘गार्ड ऑफ ऑनर’
भारतीय सेना की सात राजपूताना राइफल्स और नौ डेकन हार्स की टुकड़ी ने शहीद को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया। सैन्य परंपराओं के अनुसार हवा में गोलियां दागकर वीर सपूत को अंतिम सलामी दी गई। 2015 में सेना में भर्ती हुए सुरेश अपने पीछे एक बेटा, एक बेटी और भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
शहीद की अंतिम विदाई में प्रशासन और राजनीति से जुड़ी कई हस्तियों ने शिरकत की। विधायक अमित चाचाण, एडीएम संजू पारीक, एसडीएम राहुल श्रीवास्तव, और भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष काशी राम गोदारा सहित कई पूर्व विधायकों और प्रधानों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। स्थानीय सरपंच प्रतिनिधियों और किसान सभा के पदाधिकारियों ने भी शहीद के परिवार को ढांढस बंधाया।
