हनुमानगढ़। देशभर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिले के सबसे अहम प्रशासनिक केन्द्र जिला कलक्ट्रेट की वास्तविक स्थिति इन दावों को खोखला साबित कर रही है। जिला कलक्ट्रेट भवन में बने अधिकांश शौचालयों की हालत अत्यंत दयनीय बनी हुई है। शौचालयों और पानी की टंकियों से लगातार उठ रही दुर्गंध न केवल कर्मचारियों बल्कि यहां आने वाले आम नागरिकों के लिए भी भारी परेशानी का कारण बन रही है।

शुक्रवार को अधिवक्ता विक्रम बिश्नोई ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर जिला कलक्टर डॉ. खुशाल यादव को महात्मा गांधी के नाम ज्ञापन सौंपते हुए शौचालयों की बदहाल स्थिति से अवगत करवाया। अधिवक्ता विक्रम बिश्नोई ने जिला कलक्ट्रेट परिसर की बदहाल स्वच्छता व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी, लेकिन कलक्ट्रेट भवन की स्थिति देखकर यह अभियान केवल नारों और फाइलों तक सीमित नजर आता है। उन्होंने कहा कि पूरे परिसर में सफाई व्यवस्था नाम मात्र की है।



गैलरियों में दुर्गंध फैली हुई है, जगह-जगह जाले लगे हैं और कई शौचालयों पर ताले लटके हुए हैं, जिससे आमजन को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्वच्छता के लिए निर्धारित बजट नियमित रूप से खर्च किया जा रहा है, लेकिन उसका लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा। सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जिससे प्रशासनिक उदासीनता साफ झलकती है।

बिश्नोई ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि जिला मुख्यालय पर ही इस तरह के हालात हैं, तो अन्य सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता की कल्पना करना ही व्यर्थ है। एडवोकेट बिश्नोई ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रार्थना है कि वे जिला कलक्टर को सद्बुद्धि दें, ताकि सड़ांध मार रहे जिला कलक्ट्रेट परिसर में बने शौचालयों की स्थिति सुधारी जा सके और यहीं से स्वच्छ भारत मिशन की वास्तविक शुरुआत हो।

जर्जर शौचालय बने परेशानी की वजह

तहसील कार्यालय में कार्यरत विकास शर्मा ने बताया कि तहसील कार्यालय के शौचालय का निर्माण वर्ष 1996 में हुआ था। लंबे समय से मरम्मत कार्य नहीं होने के कारण शौचालय अब पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। सुरक्षा व स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में शौचालय पर ताला लगाकर उसे बंद कर दिया गया है। इस वजह से तहसील कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों एवं रोजाना विभिन्न कार्यां से आने वाली आम जनता को आरडब्ल्यू कोर्ट तथा जिला कलक्ट्रेट भवन के पीछे नगर परिषद की ओर से बनाए गए शौचालयों का उपयोग करना पड़ रहा है। इससे उन शौचालयों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। विकास शर्मा ने यह भी जानकारी दी कि आरडब्ल्यू कोर्ट एवं एसडीएम कार्यालय के शौचालयों का जीर्णोद्धार पिछले वर्ष ही करवा दिया गया था, लेकिन किसी कारणवश उसी समय तहसील कार्यालय के शौचालय की मरम्मत नहीं हो सकी।
