हनुमानगढ़। शहर में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक अब मासूमों की जान पर भारी पड़ने लगा है। टाउन क्षेत्र में हाल ही में सामने आई एक घटना ने न केवल अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गली में खेल रहे एक 7-8 वर्षीय बालक पर कुत्ते के हमले ने यह साबित कर दिया है कि शहर में छोटे बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। भाजपा नगर मण्डल अध्यक्ष नितिन बंसल ने बताया कि गुरुवार को टाउन निवासी एक गरीब परिवार के बालक रोशन पुत्र संजय दास को एक पालतू कुत्ते ने पैर पर काट लिया। उस समय बालक ई-रिक्शा लेने जा रहा था।

आसपास खेल रहे अन्य बच्चों ने साहस दिखाते हुए उसे बचाया, अन्यथा यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी। घटना के बाद बालक को तुरंत इंजेक्शन लगवाया गया। बंसल ने कहा कि यह कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि टाउन-जंक्शन शहर की यह एक ज्वलंत समस्या बन चुकी है। शहर के गली-मोहल्लों में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर फैला हुआ है कि छोटे बच्चे घर से बाहर निकलने में डरने लगे हैं। कई इलाकों में बच्चे गली में खेलना छोड़ चुके हैं और अभिभावक हर समय अनहोनी की आशंका से घिरे रहते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस गंभीर समस्या को लेकर नगर परिषद अधिकारियों को कई बार मौखिक व लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। नगर परिषद अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं और शायद किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुत्तों को भी जीने का अधिकार है, यह बात सही है, लेकिन मनुष्य को भी सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार है। यदि डॉग लवर्स को कुत्तों से इतना प्रेम है तो वे आवारा कुत्तों को अपने घर में रखकर उन्हें पालतू बनाएं। बंसल ने मांग की कि शहर के गली-मोहल्लों में घूम रहे खूंखार कुत्तों को पकड़कर गैर-आबादी क्षेत्रों में छोड़ा जाए।
नगर परिषद आयुक्त का पक्ष

नगर परिषद आयुक्त सुरेन्द्र यादव ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश व दिशा-निर्देशों के अनुरूप नगर परिषद की ओर से कुत्तों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। डॉग बाइट अथवा हिंसक प्रवृत्ति वाले कुत्तों की शिकायत मिलने पर नगर परिषद कर्मचारियों की ओर से उन्हें पकड़कर अस्थायी शेल्टर होम में कुछ दिनों तक रखा जाता है, जिसके बाद अन्य स्थान पर छोड़ा जाता है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थलों को कुत्तों से मुक्त करने के लिए सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही कुत्तों के टीकाकरण एवं पकड़ने के लिए टेंडर भी आमंत्रित किए गए थे, लेकिन किसी एजेंसी की ओर से टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब पुन: टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है और इच्छुक एजेंसियां ओपन टेंडर में हिस्सा ले सकती हैं।
