चारणवासी। फेफाना ग्राम पंचायत द्वारा आर्य समाज-मसानी जोहड़ पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए दी गई समय सीमा समाप्त हो पर आज भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इन अतिक्रमणों को ध्वस्त किया जाएगा। मसानी जोहड़ से कुछेक लोगों द्वारा अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिए हैं इधर उपखंड अधिकारी राहुल श्रीवास्तव ने फेफाना अतिरिक्त नायब तहसीलदार संजीव कुमार सिहाग को कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त करते हुए उन्हें ग्राम पंचायत और पुलिस प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर मौके पर शांतिपूर्वक कार्रवाई संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि सार्वजनिक भूमि पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्राम पंचायत द्वारा संबंधित अतिक्रमणकारियों के घरों पर पहले ही नोटिस चस्पा कर दिए गए थे। विकास अधिकारी के पत्रों और पंचायत समिति नोहर में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उक्त भूमि केवल सार्वजनिक उपयोग के लिए है। प्रशासन ने आधिकारिक रूप से नक्शे में दर्शाई गई जोहड़ और सड़कों की भूमि पर जारी सभी पुराने पट्टों को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया है।

–ग्रामीणों का गुस्सा
वहीं ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूर्व सरपंचों ने अपने स्वार्थ और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए जोहड़ की आरक्षित भूमि और सार्वजनिक सड़कों पर अवैध रूप से पट्टे जारी कर दिए थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पट्टे जारी करने वाले ग्राम विकास अधिकारी व पूर्व सरपंचों के खिलाफ मामले दर्ज कर प्रकरण चलाया जाए। प्रशासन की इस कार्रवाई से भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
–ये है नियम
राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 157 (पुराने गृहों का विनियमितीकरण/नियमितीकरण) के तहत, ग्रामीण आबादी भूमि पर बने पुराने मकानों/कब्जों को नियमित कर पट्टे जारी करने का प्रावधान है। बल्कि पूर्व सरपंचों व सचिवों ने खाली जगहों के लोगों को पट्टे दे दिए। जिस कारण ये समस्या उत्पन्न हो रही है हाल ही में चारणवासी में सूरजपुरी की समाधि पर अवैध पट्टा देने का ऐसा मामला सामने आया था जिसमें पंस द्वारा उक्त पट्टे निरस्त किए,ऐसा ही फेफाना में हुआ है।
–गांव की सुरक्षा का मामला है
प्रशासक मैनावंती ज्याणी और ग्राम विकास अधिकारी विवेक श्योराण ने बताया कि यह कदम केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि गांव की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। दरअसल, मसानी- आर्य समाज जोहड़ की भूमि गांव के अपशिष्ट निस्तारण और वर्षा जल के प्राकृतिक संग्रहण के लिए आरक्षित है। पिछले साल सितंबर में हुई अतिवृष्टि के दौरान अतिक्रमण की वजह से जोहड़ की जल भंडारण क्षमता बेहद कम पाई गई, जिससे बरसाती पानी गांव की गलियों और लोगों के मकानों में घुस गया। इस जलभराव के कारण कई घरों की नींव कमजोर हुई और ग्रामीणों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। तभी से ग्रामीण एकजुट होकर इन कब्जों को हटाने की मांग कर रहे थे।
