हनुमानगढ़। अश्व एवं पशु पालक सेवा समिति की ओर से जंक्शन स्थित नवां बाइपास पर आयोजित अश्व मेला अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 15 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह मेला 22 फरवरी, रविवार को समारोहपूर्वक सम्पन्न होगा। समापन समारोह में विजेता अश्व पालकों को अतिथियों की ओर से सम्मानित किया जाएगा। शनिवार को मेले में अश्वों की आकर्षक नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में अश्व प्रेमी पहुंचे।

मेले में व्यापारियों और पशुपालकों की चहल-पहल पूरे दिन बनी रही। 20 फरवरी को आयोजित छोटी-बड़ी चाल प्रतियोगिता में छोटी चाल वर्ग में कुलदीप का अश्व प्रथम, परमवीर सिंह कंग का अश्व द्वितीय तथा निशान सिंह का अश्व तृतीय स्थान पर रहा। चतुर्थ स्थान अनुज भाकर और पांचवां स्थान सुखविन्द्र मान के अश्व ने प्राप्त किया। बड़ी चाल प्रतियोगिता में सिमरत के अश्व क्रमश: प्रथम व द्वितीय रहे, जबकि परमवीर कंग का अश्व तृतीय स्थान पर रहा। मेले में राजस्थान के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से व्यापारी व पशुपालक अपने श्रेष्ठ अश्व लेकर पहुंचे।

यहां अश्वों की खरीद-फरोख्त भी हुई, जिससे मेले में आर्थिक गतिविधियां भी तेज रहीं। अतिथि इशाक खान ने कहा कि यदि किसान खेती के साथ अश्व पालन को भी अपनाएं तो यह अतिरिक्त आय का सशक्त साधन बन सकता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी यदि अश्व सहित अन्य पशुओं के पालन की ओर अग्रसर हो तो वे नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से स्वत: दूर रह सकते हैं। नवदीप सिंह ने समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस वर्ष मेले में उमड़ी भीड़ पूर्व के मेलों की तुलना में अधिक रही, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है।

आयोजकों के अनुसार नवगठित समिति की ओर से लगातार तीसरे वर्ष इस मेले का आयोजन किया जा रहा है और हर वर्ष अश्व पालकों व व्यापारियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इस बार करीब 800 से 900 अश्व पालक अपने अश्वों के साथ मेले में पहुंचे, जबकि लगभग 200 अश्वों की खरीद-फरोख्त हुई। 18 व 19 फरवरी को लगभग 105 अश्वों का प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर समिति अध्यक्ष रिछपाल सिंह मान, सचिव करणी सिंह गिल, बेअन्त सिंह, कोषाध्यक्ष मोहन सिंह राठौड़, भरपूर सिंह, जसप्रीत सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
