हनुमानगढ़। हाल ही में बीकानेर जिले के डूंगरगढ़ में सरकारी विद्यालय के प्रभारी पर हुए हमले की घटना के विरोध में गुरुवार को शिक्षा विभाग के सभी संवर्गांे के कर्मचारियों ने टाउन स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के समक्ष एकत्रित होकर काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध-प्रदर्शन किया। विरोध-प्रदर्शन में प्राध्यापक, व्याख्याता, प्रधानाचार्य, अध्यापक, मंत्रालयिक कर्मचारी एवं शारीरिक शिक्षक शामिल रहे। उन्होंने शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून बनाए जाने की पुरजोर मांग सरकार से की। प्राचार्य सुरेन्द्र कुमार व प्रधानाचार्य मनोज पारीक ने बताया कि कुछ दिन पूर्व डूंगरगढ़ में एक व्यक्ति जाति प्रमाण पत्र का अधूरा फार्म भरकर सरकारी विद्यालय में हस्ताक्षर करवाने पहुंचा।

जब स्कूल इंचार्ज ने आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में हस्ताक्षर करने से मना किया, तो उक्त व्यक्ति ने पास में रखा स्टील का पतीला उठाकर उनके सिर पर हमला कर दिया और बाद में डंडे से भी वार किया। शिक्षकों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि विद्यालय के पास आय प्रमाण पत्र या जाति प्रमाण पत्र संबंधी कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता। इसके बावजूद प्रधानाचार्य को शपथपूर्वक प्रमाणित करने के लिए बाध्य किया जाता है, जो कि अनुचित है। शिक्षकों का कहना है कि ई-मित्र संचालक की ओर से आय प्रमाण पत्र में मनमाने तरीके से आय दर्ज की जाती है और संबंधित व्यक्ति उसी पर हस्ताक्षर के लिए प्रधानाचार्य पर दबाव बनाता है। मना करने की स्थिति में डूंगरगढ़ जैसी घटनाएं सामने आती हैं।

उन्होंने कहा कि भविष्य में उनके मूल कार्य पढ़ाई व बच्चों के भविष्य निर्माण के अलावा अन्य सभी कार्य नहीं किए जाएंगे। क्योंकि भय के माहौल में बच्चों को शिक्षा नहीं दी जा सकती। उन्होंने सरकार से मांग की कि आय एवं जाति प्रमाण पत्र सत्यापन की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यांे से मुक्त किया जाए। विद्यालय परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की जाए। स्कूलों में उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विशेष कानून बनाया जाए। शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पेनडाउन स्ट्राइक सहित अन्य आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भय के वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं है। शिक्षकों को केवल पढ़ाई और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने दिया जाना चाहिए।
