हनुमानगढ़। जिले के धौलीपाल क्षेत्र में स्थित गौ चिकित्सालय (गौ धाम) की भूमि को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद रविवार को उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जब हजारों की संख्या में गोभक्तों ने महापंचायत में भाग लेकर एकजुटता का प्रदर्शन किया। प्रशासन के साथ चली लंबी वार्ता के बाद तीन प्रमुख मांगों पर सहमति बनी, जिसके बाद फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया गया, हालांकि रास्ता खुलवाने को लेकर कड़ा अल्टीमेटम भी दिया गया।
सुबह से ही जुटने लगे गोभक्त
रविवार तड़के से ही आसपास के गांवों के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में गोभक्त धौलीपाल स्थित गौशाला परिसर में पहुंचने लगे। कई श्रद्धालु शनिवार रात से ही गौशाला में डेरा डालकर बैठ गए थे। पूरे परिसर में ‘गौ माता की जय’ और ‘गौ सेवा सर्वोपरि’ जैसे नारों की गूंज सुनाई देती रही। महापंचायत में शामिल लोगों ने इसे केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि गौ सेवा और धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए किसी भी प्रकार की प्रशासनिक एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया।

कैसे शुरू हुआ विवाद
उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक व्यक्ति द्वारा गौ चिकित्सालय की भूमि को लेकर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर सर्वे प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसी क्रम में पिछले दिनों सिंचाई विभाग की सर्वे टीम मौके पर पहुंची थी। सर्वे की भनक लगते ही ग्रामीणों और गोभक्तों में आक्रोश फैल गया और टीम का विरोध किया गया। इसके बाद क्षेत्रीय संगठनों और गौभक्तों ने 1 मार्च को महापंचायत बुलाने का आह्वान किया था।
“गौ चिकित्सालय सेवा का केंद्र”
महापंचायत के दौरान वक्ताओं ने कहा कि धौलीपाल स्थित गौ चिकित्सालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि बेसहारा, घायल और बीमार गौवंश के उपचार व संरक्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिदिन आसपास के क्षेत्रों से दर्जनों गौवंश उपचार के लिए लाए जाते हैं। वक्ताओं का कहना था कि यदि इस भूमि के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होती है, तो इससे न केवल गौ सेवा बाधित होगी, बल्कि धार्मिक भावनाएं भी आहत होंगी।

उपखंड अधिकारी से हुई वार्ता
दोपहर करीब दो बजे उपखंड अधिकारी महापंचायत स्थल पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता शुरू हुई, जो काफी देर तक चली। इस दौरान गोभक्तों की ओर से तीन प्रमुख मांगें प्रशासन के समक्ष रखी गईं। पहली मांग गौशाला में पेयजल आपूर्ति को नियमित और निर्बाध रूप से सुनिश्चित करने की थी, ताकि गर्मी के मौसम में गौवंश और सेवाभावियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। दूसरी मांग यह रखी गई कि गौशाला के संबंध में बिना उचित प्रक्रिया और संवाद के कोई नोटिस या एकतरफा कार्रवाई न की जाए। तीसरी और सबसे अहम मांग गौशाला तक जाने वाले रास्ते को शीघ्र खुलवाने की थी, जो वर्तमान में विवाद और अवरोध के चलते प्रभावित बताया गया।
प्रशासन का आश्वासन
वार्ता के बाद उपखंड अधिकारी ने गोभक्तों को आश्वस्त किया कि गौशाला में पेयजल आपूर्ति को तत्काल प्रभाव से नियमित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना नियमानुसार प्रक्रिया अपनाए कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। रास्ते के मुद्दे पर भी उन्होंने शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाते हुए कहा कि संबंधित विभागों से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक आश्वासन के बाद महापंचायत में मौजूद गोभक्तों ने आपसी सहमति से आंदोलन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया।

चेतावनी भी साफ
सभा को संबोधित करते हुए गोभक्त बिंदु पूनिया ने कहा कि गौशाला केवल ईंट-पत्थरों से बना ढांचा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और सेवा भावना का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग—गौशाला का रास्ता खुलवाने—पर प्रशासन ने शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की, तो समस्त गोभक्त दोबारा एकत्रित होकर इससे भी बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा, “गौ माता की सेवा में बाधा डालने वाली किसी भी शक्ति को सफल नहीं होने दिया जाएगा।”
बड़ी संख्या में गणमान्य लोग रहे मौजूद
महापंचायत में कुलविंद्र ढिल्लो, मनीष मक्कासर, अंकुश सुथार, विजय जांगिड़, राजू बडजाती, संदीप मूंड, मुकेश छींपा, दीपू घोरन, बंसी पूनिया, सौरभ छींपा, हेमंत वीर, संजय शर्मा, पवन गोदारा, सुखविंदर मान और सतिंदर मान सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने प्रशासन से अपील की कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए गौशाला की सेवा गतिविधियों में सहयोग करे और किसी भी निर्णय से पहले जनभावनाओं को ध्यान में रखे।
फिलहाल शांति, पर नजरें कार्रवाई पर
प्रशासनिक आश्वासन के बाद भले ही महापंचायत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई, लेकिन गोभक्तों ने साफ कर दिया है कि अब उनकी नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन दोबारा शुरू होने से इनकार नहीं किया जा सकता। धौलीपाल गौ चिकित्सालय भूमि विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गौ सेवा केवल सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि जनआस्था से जुड़ा विषय है, जिस पर किसी भी तरह की लापरवाही प्रशासन के लिए भारी पड़ सकती है।
