जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा—नारी सम्मान के दिन ही हुआ अपमान, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
हनुमानगढ़। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह के दौरान महिलाओं से काले दुपट्टे उतरवाने की घटना को लेकर सियासत तेज हो गई है। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मनीष मक्कासर ने इस पूरे घटनाक्रम को शर्मनाक बताते हुए प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोमवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि जिस दिन देश-दुनिया में नारी शक्ति का सम्मान और उनके अधिकारों की बात की जाती है, उसी दिन हनुमानगढ़ में महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिससे उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मक्कासर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं मुख्यमंत्री से मिलने और अपनी समस्याएं बताने के उद्देश्य से पहुंची थीं। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर उन्हें कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश से पहले अपने काले दुपट्टे उतारने के लिए कहा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन से कई बार अनुरोध करने के बावजूद महिलाओं और बेटियों को मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया गया। उनका कहना था कि यदि विपक्ष के नेता या कार्यकर्ता काले कपड़े पहनकर कार्यक्रम में पहुंचते तो इसे विरोध की आशंका के रूप में देखा जा सकता था, लेकिन महिलाओं को इस तरह रोकना और उनके दुपट्टे उतरवाना पूरी तरह अनुचित और अपमानजनक है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि महिला दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर प्रदेश के मुखिया के सामने इस प्रकार की घटना होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की भावनाओं की अनदेखी की और उन्हें असहज स्थिति में डाल दिया।

उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनहीनता को भी दर्शाती है। मक्कासर ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय समारोह के नाम पर सरकारी तंत्र का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया और लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन कार्यक्रम में आई महिलाओं के लिए मूलभूत सुविधाओं तक का समुचित प्रबंध नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल पर पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे दूर-दराज से आई महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि अवकाश के दिन भी कई अधिकारियों और कर्मचारियों को सड़कों पर खड़ा कर दिया गया, जिससे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की स्थिति बनी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मक्कासर ने मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर भी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि करीब एक वर्ष बाद मुख्यमंत्री का हनुमानगढ़ दौरा हुआ था, इसलिए जिले के लोगों को उनसे काफी उम्मीदें थीं। किसानों, व्यापारियों और अन्य वर्गों को उम्मीद थी कि उनके हितों से जुड़ी समस्याओं पर कोई बड़ी घोषणा होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जिले में लंबे समय से बंद पड़ी स्पिनिंग मिल को शुरू करने, हनुमानगढ़ को राइस बेल्ट के रूप में विकसित करने या शुगर मिल की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। उन्होंने किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कहा कि कई किसानों को डिग्गियों के निर्माण पर मिलने वाली अनुदान राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। इसके अलावा धाणका समाज भी पिछले लगभग एक वर्ष से जाति प्रमाण पत्र जारी करने पर लगी रोक हटाने की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे विपक्षी नेताओं और किसान नेताओं को पुलिस द्वारा डिटेन कर लिया गया। मक्कासर ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की समस्याएं सुनना और उनका समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन यहां उल्टा ही देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मुख्यमंत्री को चुना, उन्हीं की समस्याएं सुनने के लिए समय नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि भाजपा को चुनाव से डर लगता है, इसलिए चुनाव टाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासक व्यवस्था लागू होने के कारण आम लोगों को अपने छोटे-छोटे काम करवाने के लिए भी इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने अंत में मांग की कि महिला दिवस के मौके पर महिलाओं के साथ हुई इस घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन अधिकारियों की वजह से महिलाओं को अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ा यह मुद्दा केवल राजनीति का विषय नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का मामला है, इसलिए दोषियों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनमोहन सोनी, जयराम ढूकिया, लोकेंद्र भाटी, मोहनलाल इंदलिया, मांगीलाल स्वामी, रणवीर नायक, आमिर खान, शाहरूख, जयपाल गिरी, खुशी अमलानी, विजय, बंशीलाल और हरीपाल सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
