नोहर। समाज में व्याप्त दहेज जैसी कुरीति के खिलाफ एक सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नोहर क्षेत्र के दो शिक्षित परिवारों ने सादगी, जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया। सरदारपुरा बास निवासी सहकारी बैंक कर्मचारी गिरधारी लाल सहारण की पुत्री अनीशा का विवाह बुधवार रात डॉ. अमनदीप, पुत्र जसवंत भांभू के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। विवाह समारोह में क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे और नवदंपति को आशीर्वाद प्रदान किया। विवाह के उपलक्ष्य में आयोजित प्रीतिभोज एवं आशीर्वाद समारोह में सामाजिक सौहार्द और सादगी का वातावरण देखने को मिला। समारोह में उपस्थित लोगों ने नवदंपति को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। विवाह की सभी रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुईं। गुरुवार सुबह कन्या की विदाई से पूर्व प्रचलित परंपरा के अनुसार “समठुनी” की रस्म निभाई गई। इस दौरान सहारण परिवार की ओर से दहेज स्वरूप नगद राशि और एक चौपहिया वाहन देने की पेशकश की गई। लेकिन दूल्हे पक्ष के भांभू परिवार ने इस प्रस्ताव को विनम्रता से अस्वीकार करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि उनके लिए दहेज का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने वधु अनीशा को ही परिवार की ‘गृह लक्ष्मी’ मानते हुए पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया। भांभू परिवार ने दहेज के स्थान पर केवल शगुन के तौर पर एक रुपया और नारियल स्वीकार कर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की। इस कदम की समारोह में उपस्थित लोगों ने खुले दिल से सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक पहल बताया। लोगों का कहना था कि ऐसे जागरूक और शिक्षित परिवारों के प्रयासों से ही दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। गौरतलब है कि वर्तमान समय में समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ रही है। कई परिवार इस कुरीति को त्यागकर सरल और आदर्श विवाह की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। भांभू और सहारण परिवार की यह पहल भी उसी सकारात्मक बदलाव का उदाहरण है, जो समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रही है। सामाजिक जानकारों का मानना है कि दहेज प्रथा के कारण कई परिवार आर्थिक और मानसिक दबाव में आ जाते हैं, जबकि बेटियां किसी भी परिवार के लिए बोझ नहीं बल्कि सम्मान और गर्व का कारण होती हैं। ऐसे में जब शिक्षित और जागरूक परिवार दहेज को ठुकराकर बेटियों को सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हैं, तो यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। सहारण और भांभू परिवार द्वारा प्रस्तुत यह अनुकरणीय पहल न केवल दहेज प्रथा पर एक सशक्त प्रहार है, बल्कि समाज में बेटियों के सम्मान और समानता के संदेश को भी मजबूत करती है। क्षेत्र में इस निर्णय की व्यापक सराहना हो रही है और लोग इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
संवाददाता- संतोष
