हनुमानगढ़। मां भद्रकाली क्षेत्र विकास सेवा समिति ने केन्द्र सरकार की फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना में राजस्थान, विशेष रूप से हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों को शामिल करने की मांग उठाई है। इस संबंध में समिति की ओर से शुक्रवार को जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर आवश्यक कार्यवाही की मांग की गई। समिति अध्यक्ष यशवंत सिंह ने बताया कि हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले भौगोलिक रूप से पंजाब और हरियाणा राज्यों से सटे हुए हैं तथा इन क्षेत्रों में चावल की खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है। इन जिलों की कृषि पद्धति भी काफी हद तक पंजाब और हरियाणा के समान है, जिसके चलते यहां पराली जलाने की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। समिति ने बताया कि वर्तमान में केन्द्र सरकार की ओर से संचालित फसल अवशेष प्रबंधन योजना केवल पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कुछ क्षेत्रों में लागू है, जबकि राजस्थान इस योजना से बाहर है। ऐसे में यहां के किसानों को पराली प्रबंधन से संबंधित मशीनरी, सब्सिडी और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में पराली जलाने से उठने वाला धुआं न केवल स्थानीय स्तर पर प्रदूषण बढ़ाता है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक भी पहुंचता है। इस स्थिति को देखते हुए राजस्थान को भी इस योजना में शामिल किया जाना आवश्यक है। समिति ने जिला प्रशासन से मांग की कि राजस्थान राज्य, विशेष रूप से हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों को केन्द्र की सीआरएम योजना में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को अनुशंसा भेजी जाए। इसके अलावा राज्य स्तर पर पराली प्रबंधन के लिए अलग से राजस्थान फसल अवशेष प्रबंधन योजना शुरू करने तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों को आधुनिक मशीनरी और जागरूकता कार्यक्रम उपलब्ध करवाने की भी मांग की गई। समिति का कहना है कि इस प्रकार की पहल से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी और किसानों को पराली से अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसर भी प्राप्त हो सकेंगे। इस मौके पर समिति सचिव सुरेन्द्र सिंह शेखावत और कोषाध्यक्ष मोहम्मद असलम भी मौजूद रहे।
