हनुमानगढ़। जिले में कड़ाके की ठंड का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। सुबह के समय घना कोहरा छा रहा है। बुधवार को भी घना कोहरा छाने से जनजीवन बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार अभी मौसम में कोई बदलाव के आसार नहीं है। ठंडी हवाओं ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया है। सरकारी और निजी अस्पतालों में सर्दी, खांसी, सांस संबंधी परेशानियों व बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मौसम में आए बदलाव से विशेषकर बुजुर्ग और बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। वरिष्ठ शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रमाशंकर आसोपा ने बताया कि वर्तमान में चल रहे सर्दी के मौसम में छोटे विशेषकर एक साल से नीचे के बच्चे जल्द ठंड की चपेट में आ जाते हैं। ठंड की शिकायत से बच्चों को विभिन्न तरह की बीमारियां होने की संभावना रहती है।

ठंड से बचाव के उपायों की तरफ ध्यान देना चाहिए। बच्चों के पूरे शरीर के साथ सिर, हाथ-पैर को ढककर रखें। एकदम ठंडी जगह पर बच्चे को न जाने दें। अचानक तापमान बदलने से प्रभाव अधिक होता है। घर में मां या अन्य किसी बड़े व्यक्ति को ठंड लगी हुई है तो उससे बच्चे को इन्फेक्शन होने की संभावना अधिक रहती है। अगर परिवार में किसी को खांसी, जुकाम या सर्दी से संबंधित कोई बीमारी है तो उसे बच्चों के पास मास्क लगाकर व अच्छी तरह से हाथ धोकर ही जाना चाहिए। बच्चे को दूध पिलाते समय मां मास्क लगाकर रखे। इसके अलावा सर्दी से बचाव की कई वैक्सीन आती हैं। छह माह की आयु में पहली तो इसके एक माह के बाद दूसरी वैक्सीन बच्चे को अवश्य लगवाएं। इससे सर्दी-जुकाम या उससे होने वाली तकलीफें कुछ कम होती हैं। इसके अलावा डेढ़ माह, ढाई माह और साढ़े तीन माह में लगने वाली वैक्सीन भी जरूर लगवाएं। यह वैक्सीन भी बच्चों को सर्दी और सर्दी से जनित रोगों से बचाने में कारगर साबित होते हैं। डॉ. आसोपा ने बताया कि सर्दी में गर्म पानी, गर्म सूप सहित अन्य इस तरह की डाइट लें जिससे सर्दी का प्रभाव कुछ कम हो। हालांकि कोई फल ठंड या गर्म नहीं होता। लेकिन जिन फलों को ठंडा माना जाता है उनका सेवन सुबह-शाम के समय न करें। दिन के समय फल का सेवन करें। सभी फल शरीर के लिए आवश्यक हैं जो शरीर को विटामिन और मिनरल प्रदान करते हैं। इससे इम्युनिटी बढ़ती है। बच्चों को ड्राई फ्रूटस देने में विशेष सावधानी बरतें। दो साल से कम आयु के बच्चों को कुछ ड्राई फ्रूटस पीसकर दें।

खांसी कर रही परेशान
डॉ. आसोपा ने बताया कि ठंड का असर बच्चों के अलावा बुजुर्गांे में अधिक होता है। एकदम मौसम बदलने पर अस्पताल में बच्चों की संख्या बढ़ जाती है। मौसम स्थिर होने पर यह संख्या धीरे-धीरे कम हो जाती है। मौसम बदलने के समय सर्दी-जुकाम के अलावा वायरल इन्फेक्शन अधिक होते हैं। लेकिन कुछ समय के बाद शरीर वापस स्वस्थ हो जाता है। लेकिन वर्तमान में चल रही वायरल इन्फेक्शन की खांसी 10 से 15 दिन तक परेशान कर रही है। खांसी के लिए छोटे बच्चों को कफ सिरप की जरूरत नहीं होती। एक या दो साल से बड़े बच्चों को शहद और नींबू मिलाकर दिया जा सकता है। रात को सोते समय एक चम्मच शहद में दो-चार बूंद नींबू रस डालकर बच्चे को दें। यह खांसी का बेहतर घरेलू उपाय हैं।
