हनुमानगढ़। भाई-बहन के पवित्र प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को हनुमानगढ़ में पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। सुबह से ही घर-घर में पर्व की तैयारियां नजर आईं। बहनों ने विधि-विधान से भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर उनकी रक्षा और हर सुख-दुख में साथ देने का संकल्प दोहराया। रक्षाबंधन पर बहनों ने सबसे पहले भाइयों का तिलक किया और आरती उतारी। इसके बाद उनकी कलाई पर रंग-बिरंगी राखियां बांधीं। राखी बांधने के बाद बहनों ने भाइयों का मुंह मीठा कराया। भाइयों ने भी बहनों को मिठाई खिलाकर पर्व की खुशियां साझा कीं। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्यों ने भी भाई-बहन के इस स्नेहपूर्ण रिश्ते के खूबसूरत पलों को यादगार बनाया।

कई घरों में बहनें दूर-दराज से अपने मायके पहुंचीं। लंबे समय बाद भाई से मिलने की खुशी उनके चेहरे पर साफ नजर आई। वहीं, जिन बहनों के भाई दूसरे शहरों में रहते हैं, उन्होंने यात्रा कर भाइयों के घर पहुंचकर राखी बांधी। सुबह से दोपहर तक घरों में राखी बांधने का सिलसिला चलता रहा। बहनों ने भाइयों के लिए पसंद की राखियां और भाइयों ने बहनों के लिए उपहार खरीदे।

रोडवेज बसों में रही भारी भीड़
रक्षाबंधन पर बहनों के लिए राजस्थान रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा का असर भी साफ दिखाई दिया। बस स्टैंड पर सुबह से ही यात्रियों की भीड़ जुटने लगी। विभिन्न रूटों पर चलने वाली रोडवेज बसों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बहनें सफर करती नजर आईं। कई बसों में यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण भीड़ रही। निशुल्क यात्रा की सुविधा के चलते बहनों को अपने मायके या भाइयों के घर पहुंचने में आर्थिक राहत मिली। ग्रामीण क्षेत्रों से शहर और शहर से आसपास के कस्बों की ओर जाने वाली बसों में भी महिलाओं की अच्छी संख्या रही। बस स्टैंड पर बसों के इंतजार में यात्रियों की कतारें और भीड़ दिखाई दी।
बाजारों में भी दिखी पर्व की रौनक
रक्षाबंधन को लेकर शहर के बाजार भी गुलजार रहे। राखियों, मिठाइयों, कपड़ों और उपहारों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रही। बहनों ने भाइयों के लिए आकर्षक राखियां खरीदीं तो भाइयों ने बहनों को देने के लिए उपहारों की खरीदारी की।

मिठाई की दुकानों पर भी दिनभर ग्राहकों की आवाजाही बनी रही। पूरे दिन शहर में रक्षाबंधन की रौनक नजर आई। कहीं बहनें राखी लेकर भाई के घर पहुंचती दिखीं तो कहीं भाई अपनी बहनों को लेने पहुंचे। इस तरह प्रेम, विश्वास और अपनत्व के प्रतीक रक्षाबंधन ने परिवारों को स्नेह के बंधन में बांध दिया।
