
हनुमानगढ़। भारतीय संविधान एवं मंडल आयोग की रिपोर्ट के अनुरूप अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की मूल भावना को लागू कराने की मांग को लेकर सामाजिक समरसता न्याय मंच, हनुमानगढ़ ने राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग, जयपुर के अध्यक्ष को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वर्ष 1999 में राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक रूप से संपन्न वर्गों को ओबीसी सूची में शामिल किए जाने को असंवैधानिक व मंडल आयोग की सिफारिशों के विपरीत बताते हुए उन्हें सूची से बाहर करने की मांग की गई है। मंच के अध्यक्ष रामप्रताप भाट उर्फ प्रकाशनाथ ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि आज़ादी के बाद लंबे समय तक अन्य पिछड़ा वर्ग को संवैधानिक प्रावधानों के बावजूद कोई ठोस लाभ नहीं मिला। मंडल आयोग की रिपोर्ट (1980) के आधार पर वर्ष 1990 में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू हुआ, जिसे व्यापक विरोध और न्यायिक चुनौतियों के बावजूद माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने वैध ठहराया। इसके परिणामस्वरूप ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ मिलना प्रारंभ हुआ। परंतु वर्ष 1999 में बिना किसी समुचित सामाजिक-आर्थिक सर्वे के, राजनीतिक दबाव के चलते कुछ संपन्न वर्गों को ओबीसी सूची में शामिल कर लिया गया, जिससे वास्तविक रूप से वंचित अति पिछड़ा वर्ग हाशिये पर चला गया। ज्ञापन में हनुमानगढ़ जिले के वर्ष 2020 के जिला परिषद एवं पंचायत समिति चुनावों के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों पर अधिकांशतः संपन्न वर्ग (विशेषकर जाट वर्ग) का वर्चस्व रहा। जिला परिषद हनुमानगढ़ की 29 सदस्यीय परिषद में 16 सदस्य संपन्न वर्ग से रहे, जो कुल का 55 प्रतिशत है। ओबीसी के लिए आरक्षित 5 सीटों में से 4 पर संपन्न वर्ग के प्रतिनिधि निर्वाचित हुए। इसी प्रकार पंचायत समिति भादरा में 27 में से 18 सदस्य (66 प्रतिशत) संपन्न वर्ग से रहे और ओबीसी की सभी 6 आरक्षित सीटें उसी वर्ग ने जीतीं। पंचायत समिति नोहर और रावतसर में भी ओबीसी आरक्षित सीटों पर 100 प्रतिशत संपन्न वर्ग का प्रतिनिधित्व दर्ज किया गया। संगरिया, पीलीबंगा और हनुमानगढ़ पंचायत समितियों में भी यही स्थिति सामने आई, जहां ओबीसी आरक्षित सीटों पर मूल वंचित वर्ग की बजाय संपन्न वर्ग के प्रतिनिधि निर्वाचित हुए। मंच का कहना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वर्ष 1999 के बाद शामिल किए गए वर्ग सामाजिक या शैक्षणिक रूप से पिछड़े नहीं हैं, फिर भी आरक्षण का लाभ लेकर वे राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर कब्जा जमाए हुए हैं। सामाजिक समरसता न्याय मंच के अध्यक्ष रामप्रताप भाट ने आयोग से मांग की कि मंडल आयोग की मूल रिपोर्ट में वर्णित कामगार व मूल ओबीसी वर्ग को ही आरक्षण का वास्तविक लाभ दिया जाए। इसके लिए वर्ष 1999 में जोड़े गए संपन्न वर्गों-जैसे जाट, बिश्नोई आदि-को ओबीसी सूची से बाहर किया जाए, ताकि सामाजिक असमानता कम हो और वंचित वर्गों को न्याय मिल,सके। मंच ने उम्मीद जताई कि आयोग इस गंभीर विषय पर संवैधानिक दायरे में उचित निर्णय लेकर सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस पहल करेगा। इस मौके पर अध्यक्ष रामप्रताप उर्फ प्रकाशनाथ, रामलाल किरोड़ीवाल मुकेश भार्गव एडवोकेट रामस्वरूप नंदीवाल सतपाल लिम्बा आरके वर्मा राजेश जी छिंपा राधेराम,सुथार कृष्णा गहलोत दुर्गादत्त सैनी केशव पाल विजयभाट रामस्वरूप भाटी अशोक सुथार संदीप कृष्ण लाल महावीर स्वामी सुरेंद्र जंलदरा,मोहनलाल डाल, एड.अभिषेक खटोड समाजो के प्रतिनिधि व्यक्ति उपस्थित रहे।
