– राजस्व मंडल और जिला कलक्टर के आदेश निरस्त, कोर्ट बोली-संभाग के भीतर तबादले का अधिकार केवल संभागीय आयुक्त के पास
हनुमानगढ़। राजस्थान हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ जिले में कार्यरत भू-अभिलेख निरीक्षक (आईएलआर) चंद्रभान ज्यानी के तबादले को अवैध मानते हुए राजस्व मंडल और जिला कलक्टर की ओर से जारी दोनों स्थानांतरण आदेश रद्द कर दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एक ही संभाग के भीतर भू-अभिलेख निरीक्षक का तबादला करने का अधिकार केवल संभागीय आयुक्त के पास है। यह फैसला डॉ. जस्टिस नुपुर भाटी की एकलपीठ ने सुनाया। याचिकाकर्ता चंद्रभान ज्यानी पुत्र समर्थ लाल निवासी डबलीवास पेमा, हनुमानगढ़, पक्का सारणा सर्कल में भू-अभिलेख निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने राजस्व मंडल की ओर से 10 जुलाई 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश तथा उसके अनुपालन में जिला कलक्टर हनुमानगढ़ की ओर से 13 जुलाई 2026 को जारी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वर्ष 2024 के ‘छगन लाल पटेल बनाम राजस्व मंडलÓ मामले का हवाला दिया गया, जिसमें समान परिस्थितियों में न्यायालय पहले ही अपना निर्णय दे चुका था। सरकारी पक्ष भी इस तथ्य का प्रभावी खंडन नहीं कर सका। अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान भू-राजस्व (भू-अभिलेख) नियम, 1957 के नियम 173 के अनुसार, एक ही संभाग के भीतर भू-अभिलेख निरीक्षक (आईएलआर) का तबादला करने का अधिकार केवल संभागीय आयुक्त को प्राप्त है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्व मंडल के पास पूरे राज्य स्तर पर स्थानांतरण करने की शक्ति अवश्य है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह संभागीय आयुक्त या जिला कलक्टर के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करे। ऐसा करने से अधिकारों का टकराव और प्रशासनिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। इन तथ्यों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 और 13 जुलाई 2026 के दोनों स्थानांतरण आदेशों को रद्द कर दिया तथा चंद्रभान ज्यानी की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
