– हनुमानगढ़ टाउन की महिलाओं ने पेश की आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की मिसाल
हनुमानगढ़। महिला सशक्तिकरण आज केवल एक सामाजिक अवधारणा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाला सकारात्मक बदलाव बन चुका है। हनुमानगढ़ टाउन जैसे अर्ध-शहरी क्षेत्र में महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, व्यवसाय और पुलिस सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर रही हैं। यह बात विधि छात्राओं राजप्रीत कौर एवं आकाशदीप कौर की ओर से किए गए अध्ययन और संवाद के दौरान सामने आई। अध्ययन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं से बातचीत की गई, जिसमें उनके संघर्ष, उपलब्धियों और समाज में बदलती भूमिका को समझने का प्रयास किया गया। महिलाओं ने बताया कि सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं। एक महिला उद्यमी ने बताया कि उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सफलता हासिल की। वहीं एक शिक्षिका ने एकल माता के रूप में सामाजिक चुनौतियों से संघर्ष कर सम्मानजनक जीवन स्थापित किया। एक महिला थाना प्रभारी ने कहा कि अब महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो रही हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने लगी हैं। अध्ययन के दौरान एक चिकित्सक ने बताया कि समाज के कुछ हिस्सों में आज भी बेटा-बेटी के बीच भेदभाव देखने को मिलता है, लेकिन नई पीढ़ी की सोच में सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है और लैंगिक समानता को अधिक स्वीकार किया जा रहा है।

सबसे प्रेरणादायक उदाहरण एक मुस्लिम समुदाय की योग प्रशिक्षिका का सामने आया, जिन्होंने सीमित शिक्षा और संसाधनों के बावजूद हार नहीं मानी। अपने आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम के बल पर वे आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य कर रही हैं। इसी प्रकार एक सहायक कर्मचारी (बाई जी) की कहानी ने यह संदेश दिया कि सशक्तिकरण किसी पद या प्रतिष्ठा का मोहताज नहीं होता। उन्होंने अपने परिश्रम से परिवार का पालन-पोषण किया और जीवन की कठिन परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना किया। हालांकि महिलाओं की स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, लेकिन घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव और रूढ़िवादी सामाजिक सोच जैसी चुनौतियां आज भी मौजूद हैं। इसके बावजूद महिलाओं का आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का संकल्प समाज में नई उम्मीद जगा रहा है। राजप्रीत कौर एवं आकाशदीप कौर ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 महिलाओं को समानता, भेदभाव से संरक्षण तथा गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्रदान करते हैं, जो महिला सशक्तिकरण की मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन से उन्हें महिलाओं के संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास को करीब से समझने का अवसर मिला। छोटे शहरों की महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं और समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रही हैं। अध्ययन का निष्कर्ष है कि महिला सशक्तिकरण केवल कानूनों के माध्यम से नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव और समान अवसरों की उपलब्धता से संभव है। यदि महिलाओं को उचित समर्थन और अवसर मिलें, तो वे राष्ट्र निर्माण में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
