– युवाचार्य श्री महावीर जी सहित साधु-साध्वियों के मंगल सान्निध्य में संजय जैन की तपस्या का हुआ पारणा
हनुमानगढ़। आचार्य श्री महाश्रमण जी की पावन भाव प्रेरणा एवं आशीर्वाद से संजय जैन की इक्कीस दिन की कठिन तपस्या का सफलतापूर्वक पारणा लाडनूं में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। तपस्या के प्रत्याख्यान का सौभाग्य स्वयं महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा प्रदान किया गया। इक्कीस दिनों की कठोर साधना पूर्ण होने पर पूरे जैन समाज में हर्ष और आध्यात्मिक उमंग का वातावरण रहा। पारणा के पावन अवसर पर युवाचार्य श्री महावीर जी का मंगल पदार्पण हुआ। साथ ही साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुत विभा जी, साध्वीवर्या जी, बहुश्रुत संयोजक मुनि श्री सुमति कुमार जी, साध्वी श्री चरितार्थ प्रभा जी, साध्वी श्री राजीमती जी, साध्वी श्री सुदर्शना श्री जी, साध्वी श्री सूरज प्रभा जी, साध्वी श्री सौम्य यशा जी सहित अनेक सिंघाड़ों से साधु-साध्वियों का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।
महिला मंडल ने गीतिका से किया अभिनंदन
इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल द्वारा भावपूर्ण कविता एवं गीतिका के माध्यम से युवाचार्य श्री महावीर जी का अभिनंदन किया गया। महिला मंडल की भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्ति एवं श्रद्धा से सराबोर कर दिया। युवाचार्य श्री ने मंगलपाठ सुनाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। हनुमानगढ़ टाउन से एक बस एवं छह गाड़ियों के माध्यम से करीब 75 श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक अवसर के साक्षी बनने लाडनूं पहुंचे। इनके साथ धौलीपाल एवं आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। तपस्वी संजय जैन की इक्कीस दिन की तपस्या पूर्ण होने की खुशी सभी श्रद्धालुओं के चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी।
अभिग्रह फला तो जयघोष से गूंज उठा हरियाणा भवन
लगभग सुबह 9:20 बजे पारणे की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। जैसे ही अभिग्रह फला, श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। जयघोष एवं नारों से हरियाणा भवन गूंज उठा। उपस्थित जनसमुदाय ने तपस्वी की कठिन तपस्या की अनुमोदना करते हुए श्रद्धा एवं हर्ष के साथ वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात करीब 12:10 बजे आचार्य श्री महाश्रमण जी ने सेवा का समय प्रदान किया। इस अवसर पर गुरुदेव ने हनुमानगढ़ टाउन में दो दिन तथा धौलीपाल पधारने की अर्ज स्वीकार की। गुरुदेव के समक्ष हनुमानगढ़ संघ एवं तपस्वी संजय जैन के परिवार की उपस्थिति से सभी को विशेष आनंद एवं आध्यात्मिक प्रसन्नता की अनुभूति हुई। आचार्य श्री के सान्निध्य में तपस्या के प्रत्याख्यान और पारणे का यह अवसर संजय जैन के परिवार के साथ-साथ हनुमानगढ़ टाउन एवं धौलीपाल के श्रद्धालुओं के लिए भी अविस्मरणीय बन गया। इक्कीस दिनों की तपस्या के माध्यम से संजय जैन ने आत्मसंयम, साधना और दृढ़ संकल्प का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने मंगलपाठ सुनाकर सभी को आध्यात्मिक मंगलकामनाएं प्रदान कीं। पूरे आयोजन में तप, त्याग, श्रद्धा, संघ-निष्ठा और गुरु भक्ति की अनुपम झलक देखने को मिली। संजय जैन की इक्कीस दिन की तपस्या का यह पावन प्रसंग हनुमानगढ़ के तेरापंथ समाज के लिए लंबे समय तक प्रेरणा और स्मृति का विषय बना रहेगा।
