– रूप चतुर्दशी और दीपावली एक ही दिन, 9 नवंबर को अन्नकूट व 11 नवंबर को भैया दूज; धनतेरस पर नए पात्र और झाड़ू खरीदने का विशेष महत्व
हनुमानगढ़। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष का दीपावली उत्सव पांच दिन के बजाय छह दिन मनाया जाएगा। धनतेरस से भैया दूज तक चलने वाले इस पर्व में तिथियों के विशेष संयोग के कारण रूप चतुर्दशी और दीपावली एक ही दिन पड़ रही हैं। पंडित रतनलाल शास्त्री ने बताया कि 8 नवंबर रविवार को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा और इसी दिन माता लक्ष्मी का पूजन होगा। उन्होंने बताया कि इस बार धन त्रयोदशी शुक्रवार को द्वादशी के दिन ही पड़ रही है। शनिवार को त्रयोदशी के साथ चतुर्दशी रहेगी। रविवार को चतुर्दशी के दिन दोपहर बाद अमावस्या शुरू हो जाएगी, जो पूरी रात्रि रहेगी। सोमवार को उदयकालीन अमावस्या होने के बावजूद निशा रात्रि में अमावस्या नहीं होने के कारण दीपावली पर लक्ष्मी पूजन रविवार को ही किया जाएगा। दीपावली पर 8 नवंबर को प्रात:काल से पूजन शुरू होंगे तथा रात्रि 2.30 बजे तक सिंह लग्न रहेगा। व्यापारी अपने व्यवसाय के अनुसार शुभ चौघड़ियों में पूजन कर सकेंगे। शास्त्री ने बताया कि 9 नवंबर को अन्नकूट का विधान है। 10 नवंबर को प्रतिपदा तथा 11 नवंबर को भैया दूज मनाई जाएगी। भैया दूज पर बहनें यमुना स्नान कर भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। इस दिन माता लक्ष्मी का विसर्जन भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि धनतेरस का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन धन्वंतरी जयंती के साथ कुबेर पूजन किया जाता है। धन त्रयोदशी, रूप चतुर्दशी, दीपावली और अन्नकूट पर भी लक्ष्मी पूजन का विधान है। धनतेरस पर धातु के पात्र खरीदना शुभ माना जाता है। चांदी का बर्तन खरीदना संभव नहीं हो तो पीतल का पतीला या अन्य पात्र खरीदकर उसमें खीर बनाकर माता लक्ष्मी को भोग लगाना चाहिए। पात्र खरीदने की परंपरा को धन कुबेर की प्रसन्नता से जोड़ा जाता है। इसके अलावा उपयोगी मशीनरी, झाड़ू तथा राशन सामग्री में गुड़, चावल, मूंग, हल्दी और कमलगट्टा खरीदना भी शुभ माना जाता है। शास्त्री के अनुसार धनतेरस पर खरीदी गई उपयोगी वस्तुएं लंबे समय तक चलती हैं, ऐसी मान्यता है।
