हनुमानगढ़। मक्कासर निवासी विनोद कुमार पुत्र रूपराम ने गुरुवार को जिला कलक्टर को अंतिम प्रार्थना-पत्र सौंपकर अनुसूचित जाति की खातेदारी भूमि से जुड़े मामले में प्रभावी कार्रवाई एवं उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की। विनोद कुमार के अनुसार उसने 20 फरवरी 2026 को उपखंड अधिकारी के समक्ष इस संबंध में लिखित आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन अब तक उसे प्रकरण में हुई कार्रवाई एवं निर्णय की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। विनोद कुमार ने बताया कि मामला पुराना खाता संख्या 94, नया खाता संख्या 104, चक 25 एलएलडब्ल्यू की करीब 37 बीघा भूमि से संबंधित है। उसके अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में 22 जून 1963 के कथित दस्तावेज/स्टाम्प के आधार पर अधिकार अथवा नोट प्रविष्टि किए जाने को लेकर विवाद है। प्रार्थी ने उक्त दस्तावेज की वैधता तथा उसके आधार पर की गई राजस्व प्रविष्टि की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रार्थना-पत्र में कहा गया कि भूमि अनुसूचित जाति से संबंधित है और वर्तमान में वास्तविक खातेदार के अधिकारों के विपरीत कब्जे एवं हस्तक्षेप की स्थिति बनी हुई है। प्रार्थी ने राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 42, 183 एवं 183-बी के प्रावधानों के तहत भूमि के कथित हस्तांतरण एवं कब्जे की जांच करवाने की मांग की है। प्रार्थी ने कलक्टर से पुरानी एवं वर्तमान जमाबंदी, खसरा रिकॉर्ड, नामांतरण रिकॉर्ड, नोट प्रविष्टि तथा संबंधित मूल राजस्व पत्रावली मंगवाकर जांच करवाने की मांग की। साथ ही 22 जून 1963 के कथित दस्तावेज की उस समय लागू कानून के आधार पर वैधता जांचने तथा उसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में की गई प्रविष्टियों की प्रक्रिया एवं वैधानिक आधार की जांच करने का आग्रह किया। उन्होंने मांग की कि यदि जांच में अवैध कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई कर वास्तविक खातेदार के अधिकारों की रक्षा की जाए। यदि दस्तावेज फर्जी, कूटरचित अथवा गलत तथ्यों के आधार पर तैयार किया जाना पाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लागू राजस्व एवं आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए। विनोद कुमार ने जांच किसी ऐसे उच्च स्तरीय राजस्व अधिकारी से करवाने की मांग की है, जो पूर्व की कार्रवाई से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित न रहा हो। इसके अलावा जांच के दौरान मूल राजस्व रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, उसमें किसी प्रकार की अनधिकृत छेड़छाड़ रोकने तथा 20 फरवरी के आवेदन पर हुई कार्रवाई, जांच के निष्कर्ष एवं पारित आदेश की लिखित प्रति उपलब्ध करवाने की मांग की। प्रार्थी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुसूचित जाति के खातेदार के वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।
